मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी के लिए यह गौरव का क्षण है। हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट, केम्पटी फॉल के संस्थापक-निदेशक और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के पूर्व उप महानिरीक्षक शिव प्रसाद (एसपी) चमोली को भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार की लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी के लिए चुना है। देश के प्रतिष्ठित साहसिक सम्मानों में शामिल इस पुरस्कार का दर्जा अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष माना जाता है। 84 वर्ष की उम्र में भी एसपी चमोली की सक्रियता युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। पर्वतारोहण, स्कीइंग और रिवर राफ्टिंग के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ ही वह आज भी युवाओं, सुरक्षा बलों और आपदा प्रतिक्रिया दलों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
छह दशक से अधिक लंबे साहसिक सफर में चमोली ने कई ऐतिहासिक अभियानों का नेतृत्व किया। वर्ष 1974 में उन्होंने 21,640 फीट ऊंची नीलकंठ चोटी के प्रथम सफल आरोहण का नेतृत्व किया। 1981 में सर एडमंड हिलेरी की देखरेख में भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त हिमालयन ट्रैवर्स अभियान का नेतृत्व करते हुए कंचनजंगा से काराकोरम तक पांच हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और 265 दिनों में 106 दर्रे पार किए। यह अभियान आज भी विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है। वर्ष 1986 में उन्होंने सासेर कांगरी-3 के प्रथम आरोहण का नेतृत्व किया और इसके बाद श्योक नदी में 105 किलोमीटर लंबा राफ्टिंग अभियान पूरा किया। भारत-जापान संयुक्त ब्रह्मपुत्र राफ्टिंग अभियान में त्सांगपो गॉर्ज से धुबरी तक करीब 1100 किलोमीटर की पहली सफल राफ्टिंग का नेतृत्व भी उनके नाम दर्ज है। पुरस्कार को उत्तराखंड को समर्पित करते हुए चमोली का कहना है कि यह सम्मान जितना उनका है, उतना ही उत्तराखंड के पर्वतों और नदियों का भी है। उनका संकल्प है कि हिमालय ने उन्हें जो साहस, अनुशासन और सेवा की भावना दी, उसे अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाया जाए।

