मसूरी में रेलवे की भूमि पर कथित अनधिकृत कब्जों के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने अब एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। उत्तर रेलवे, मुरादाबाद मंडल के संपदा अधिकारी ने झड़ीपानी मार्ग स्थित एस्केप होटल के साथ कई भवनों पर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा-4 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में होटल संचालक से सात दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ बेदखली (म्अपबजपवद) का आदेश क्यों न पारित किया जाए। रेलवे प्रशासन की यह कार्रवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन वाद संख्या 2992/2023 में 16 जून 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद रेलवे अपनी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे कथित अतिक्रमणों को हटाने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रहा है। संपदा अधिकारी की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, संबंधित परिसर पर वर्ष 2011 से अनधिकृत कब्जा है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित पक्ष सार्वजनिक परिसर पर बिना वैध अधिकार के कब्जा किए हुए है, इसलिए सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा-4 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो यह माना जाएगा कि संबंधित पक्ष के पास अपने बचाव में कुछ नहीं है और उसके विरुद्ध एकपक्षीय बेदखली आदेश पारित किया जा सकता है। रेलवे भूमि पर यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी मसूरी और देहरादून क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और अन्य निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कई मामलों में रेलवे प्रशासन ने कब्जाधारियों को सुनवाई का अवसर देने के बाद बेदखली की प्रक्रिया भी शुरू की थी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा उनकी कानूनी जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना वैध अनुमति रेलवे की भूमि पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानूनी जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत जारी नोटिस के बाद संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। जवाब और साक्ष्यों के आधार पर संपदा अधिकारी अंतिम निर्णय लेते हैं। उत्तर रेलवे की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि रेलवे अपनी संपत्तियों पर कथित अतिक्रमण को लेकर अब किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रेलवे प्रशासन लगातार ऐसे मामलों की समीक्षा कर रहा है और जहां भी अनधिकृत कब्जे की शिकायत या रिकॉर्ड मिल रहे हैं, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।

