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मसूरी में एमडीडीए का अजब कारनामा! पहले से लगे क्रैश बैरियर के पास ही लगाई जा रही रेलिंग, सरकारी धन के इस्तेमाल पर उठे सवाल

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मसूरी में एमडीडीए का अजब कारनामा! पहले से लगे क्रैश बैरियर के पास ही लगाई जा रही रेलिंग, सरकारी धन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने कहा- जहां जरूरत है वहां सुरक्षा इंतजाम नहीं, पहले से बैरियर लगे स्थान पर दोबारा खर्च क्यों? उच्चस्तरीय जांच और काम रोकने की मांग।

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी मूर्ति से पिक्चर पैलेस तक सड़क किनारे रेलिंग लगाने का काम किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई स्थानों पर लोक निर्माण विभाग पहले से ही क्रॉस बैरियर लगा चुका है। इसके बावजूद एमडीडीए उन्हीं बैरियरों के बिल्कुल पास रेलिंग लगा रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे सरकारी धन के दोहराव वाले खर्च का मामला बताते हुए पूछा है कि आखिर इस निर्माण की जरूरत किस आधार पर तय की गई?। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे पहले से लगे क्रॉस बैरियर से महज आधा फीट की दूरी पर नई रेलिंग लगाई जा रही है। ऐसे में रेलिंग लगाने का उद्देश्य और उपयोगिता समझ से परे है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क सुरक्षा को मजबूत करना ही मकसद है तो उन संवेदनशील स्थानों पर रेलिंग लगाई जानी चाहिए, जहां अब तक कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं है। लेकिन यहां पहले से मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के पास ही दोबारा निर्माण कराया जा रहा है।
300 मीटर का प्रस्ताव कैसे पहुंचा दो किलोमीटर तक?
स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता गौरव गुप्ता ने बताया कि उनके क्षेत्र में कुछ महीने पहले रेलिंग नहीं होने के कारण एक कार नीचे गिर गई थी। इसके बाद उन्होंने संबंधित स्थान पर रेलिंग लगाने का प्रस्ताव दिया था। उनका आरोप है कि शुरुआत में लगभग 300 मीटर रेलिंग लगाने की बात थी, लेकिन बाद में प्रस्ताव बढ़ाकर करीब दो किलोमीटर कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रस्ताव की लंबाई बढ़ाने का आधार क्या रहा और क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर वास्तविक जरूरत का आकलन किया था?
पुराने निर्माण को तोड़कर लगाई जा रही रेलिंग, गुणवत्ता पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क किनारे पहले से बने कंक्रीट के हिस्सों को तोड़कर उनमें रेलिंग फिट की जा रही है। लोगों का कहना है कि काम में केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है और गुणवत्ता जांच को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
सभासद सचिन गुहेर ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
क्षेत्रीय सभासद सचिन गुहेर ने एमडीडीए की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मौके पर हो रहा काम कई सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने मांग की कि रेलिंग लगाने के प्रस्ताव, उसकी तकनीकी स्वीकृति और बजट की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि सरकारी धन का अनावश्यक खर्च या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और नियमानुसार धनराशि की वसूली की जाए।
एसडीएम से काम रुकवाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय लोगों ने एसडीएम मसूरी से पूरे मामले की जांच कराने और जांच पूरी होने तक कार्य रोकने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्ताव किस अधिकारी ने तैयार किया, किस आधार पर स्वीकृति दी गई और निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है। उनका कहना है कि जनता की गाढ़ी कमाई से होने वाले विकास कार्यों में जरूरत, गुणवत्ता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि एमडीडीए ने पहले से लगे क्रॉस बैरियर के पास दोबारा रेलिंग लगाने का निर्णय किस तकनीकी आधार पर लिया? क्या इस काम से वास्तव में सड़क सुरक्षा बेहतर होगी या सरकारी बजट का दोहराव वाला खर्च हो रहा है? स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद अब एमडीडीए और प्रशासन के जवाब तथा जांच की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।