स्वच्छ मसूरी अभियान को लगा रहा पलीता! बार-रेस्तरां बना गंदगी का अड्डा

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पहाड़ों की रानी मसूरी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे एक बार फिर खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। शहर में हाल ही में खुले एक बार एवं रेस्तरां द्वारा नियमों को ताक पर रखकर खुले में जूठा कूड़ा फेंका जा रहा है। हालत यह है कि पिछले तीन दिनों से सड़कों और खाली स्थान पर पड़ा खाद्य अपशिष्ट अब सड़ने लगा है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध का साम्राज्य फैल गया है। गर्मी और नमी के बीच उठ रही बदबू से स्थानीय लोगों और पर्यटकों का जीना दूभर हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि खुले में पड़े जूठे खाने पर बंदर, कुत्ते और लंगूरों का जमावड़ा लगा हुआ है। ये जानवर कूड़े को इधर-उधर फैलाकर क्षेत्र की स्वच्छता को और बिगाड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो संबंधित प्रतिष्ठान ने कोई कदम उठाया और न ही नगर पालिका प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया।
स्वच्छता रैंकिंग और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
मसूरी को बीते वर्षों में स्वच्छता के क्षेत्र में सराहना मिली है और नगर पालिका ने डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए हैं। अतीत में शहर में कूड़ा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं भी चलाई गईं। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। खुले में पड़ा कूड़ा और उससे उठती बदबू यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर स्वच्छता अभियान की निगरानी कौन कर रहा है? यदि व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम लोगों से स्वच्छता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
पर्यटकों पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
गर्मी के मौसम में मसूरी में पर्यटकों की भारी आमद रहती है। ऐसे में शहर के प्रमुख क्षेत्रों में फैली गंदगी न केवल पर्यटन छवि को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि पर्यटकों के सामने भी नगर की बदहाल सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही है। पर्यटकों का कहना है कि जिस मसूरी को प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ वातावरण के लिए जाना जाता है, वहां जगह-जगह कूड़े के ढेर और दुर्गंध निराशाजनक है।
वन्यजीवों के लिए भी खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में फेंका गया खाद्य और प्लास्टिक मिश्रित कचरा वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हाल के वर्षों में मसूरी और आसपास के क्षेत्रों में कूड़े के कारण वन्यजीवों के प्रभावित होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा कूड़ा उठाने की व्यवस्था होने के बावजूद कई होटल, रेस्तरां और बार संचालक नियमों का पालन नहीं करते। कई प्रतिष्ठान निर्धारित स्थानों पर कूड़ा देने के बजाय सुनसान जगहों और खाली भूखंडों में फेंक देते हैं। इससे न केवल गंदगी फैलती है बल्कि आवारा पशुओं और बंदरों की संख्या भी बढ़ती है। वर्ष 2024 में भी मसूरी में कूड़ा निस्तारण केंद्र के ठप होने और कूड़े के ढेर लगने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी थी। क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका और प्रशासन से मांग की है कि खुले में कूड़ा फेंकने वाले बार एवं रेस्तरां के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करें। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ष्स्वच्छ मसूरीष् का सपना केवल पोस्टरों और अभियानों तक ही सीमित रह जाएगा, जबकि हकीकत में पहाड़ों की रानी गंदगी और बदबू के बोझ तले कराहती रहेगी।