अमेरिकी विशेषज्ञ ने दिया प्रशिक्षण, रक्षा कैडेट्स, ट्रेक गाइड और सामाजिक क्षेत्र के युवाओं को मिला अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र
मसूरी, 30 मई (नवोदय टाइम्स)
पहाड़ों की रानी मसूरी में पहली बार आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के वाइल्डरनेस फर्स्ट एड प्लस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हो गया। हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट और यूएस स्कूल ऑफ सर्वाइवल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण में 25 प्रतिभागियों ने आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सफल प्रतिभागियों को दो वर्ष के लिए मान्य अंतरराष्ट्रीय ष्सर्टिफिकेट ऑफ इमरजेंसी रेडीनेसष् प्रदान किया गया। केम्प्टी फॉल स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में दून डिफेंस एकेडमी के कैडेट्स, रोटरी क्लब मसूरी द्वारा प्रायोजित छात्र, आसरा ट्रस्ट के युवा, आउटवर्ड बाउंड इंडिया हिमालयाज के प्रशिक्षक तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए ट्रेक लीडर और पर्वतीय गाइड शामिल हुए। कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं पूर्व आईटीबीपी डीआईजी एस.पी. चमोली ने की। इस अवसर पर शारदा विश्वविद्यालय के डीन प्रो. डॉ. देबाशीष मलिक तथा ब्रेक पार्ट्स इंडिया के सीईओ हरीश उनियाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रशिक्षण का संचालन अमेरिकी विशेषज्ञ एवं यूएस स्कूल ऑफ सर्वाइवल के निदेशक जॉन डॉबिन्स ने किया। अमेरिकी मरीन कोर के सेवानिवृत्त सैनिक डॉबिन्स दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों में आपदा प्रबंधन एवं वाइल्डरनेस मेडिसिन का प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के हिमालयी और दुर्गम क्षेत्रों में इस प्रकार का प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां चिकित्सकीय सहायता तक पहुंचने में कई घंटे या कई बार कई दिन भी लग जाते हैं। ऐसे में शुरुआती एक घंटे के भीतर लिया गया सही निर्णय किसी की जान बचा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीपीआर, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर का उपयोग, गंभीर रक्तस्राव नियंत्रण, हड्डी टूटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार, रीढ़ की चोटों का प्रबंधन, हाइपोथर्मिया, ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों और दुर्गम क्षेत्रों से मरीजों की सुरक्षित निकासी जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट के एसोसिएट डायरेक्टर नवीन चमोली ने कहा कि संस्था का उद्देश्य विश्वस्तरीय आपातकालीन चिकित्सा एवं बचाव प्रशिक्षण को आम युवाओं, ट्रेक गाइडों, छात्रों और सुरक्षा बलों तक पहुंचाना है। यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश में आपदा एवं आपातकालीन तैयारी की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। दून डिफेंस एकेडमी के निदेशक संदीप ने कहा कि भविष्य के सैन्य अधिकारियों और युवाओं के लिए केवल नेतृत्व कौशल ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन बचाने की क्षमता भी जरूरी है। ऐसे प्रशिक्षण उन्हें जिम्मेदार और सक्षम नागरिक बनाने में मदद करेंगे। प्रमाणित प्रतिभागी एवं एनआईएम प्रशिक्षित ट्रेक लीडर नंद बहादुर ने कहा कि वर्षों तक पहाड़ों में काम करने के बावजूद उन्हें वास्तविक आपात स्थिति से निपटने की वैज्ञानिक जानकारी नहीं थी। इस प्रशिक्षण के बाद अब वे किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में प्रभावी सहायता देने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि वर्ष 1994 में स्थापित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट अब तक एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, होमगार्ड और अग्निशमन सेवाओं के 2500 से अधिक जवानों को खोज एवं बचाव तथा आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दे चुका है। वहीं 20 हजार से अधिक युवाओं को साहसिक गतिविधियों और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा संभावित राज्य में इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण भविष्य में आपदा प्रबंधन, पर्यटन सुरक्षा और साहसिक गतिविधियों के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा।

