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उत्तराखंड में 1 दिसंबर से शुरू होगी जनगणना महाअभियान: 1.27 करोड़ जनता तक पहुंचेंगे 35 हजार कर्मचारी,चुनाव के कारण देश से पहले होगी गणना

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देहरादून। उत्तराखंड की करीब 1.27 करोड़ आबादी के सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों को दर्ज करने के लिए जनगणना का मुख्य चरण 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में आबादी की गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, लेकिन वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण केंद्र सरकार ने यहां समय से पहले जनगणना कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

प्रदेश में करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। देश के अधिकांश राज्यों में जहां आबादी की गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, वहीं विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड समेत चार राज्यों में यह काम तय समय से पहले कराया जाएगा। प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना होगी। इससे पहले 16 नवंबर से 30 नवंबर तक लोगों को स्वगणना का विकल्प दिया जाएगा। यानी इस दौरान लोग स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार उत्तराखंड में आबादी की गणना के लिए करीब 1.27 करोड़ लोगों तक प्रगणक पहुंचेंगे। इसके लिए लगभग 35 हजार कर्मचारियों की तैनाती होने की संभावना है। मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच पूरा हो चुका है। इस दौरान प्रदेश में परिवारों की संख्या 28.3 लाख से अधिक और आवासीय एवं गैर आवासीय मकानों की संख्या करीब 45 लाख सामने आई है। प्रदेश के हिम आच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का काम पहले ही शुरू हो चुका है। चार जिलों के 131 गांवों और तीन शहरों में एक सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक घर-घर जाकर आबादी की जानकारी जुटा रहे हैं। इन क्षेत्रों में गणना पूरी होने के बाद प्रदेश के बाकी हिस्सों में दूसरे चरण की तैयारियां और तेज की जाएंगी। 2011 की जनगणना में उत्तराखंड की आबादी करीब 1.01 करोड़ थी। मकान सूचीकरण के दौरान मिले अनुमान के अनुसार अब यह आबादी बढ़कर करीब 1.27 करोड़ हो गई है। यानी 15 वर्षों में प्रदेश की अनुमानित आबादी में 26 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इस बार जनगणना पहले की तुलना में ज्यादा विस्तृत होगी। निदेशालय के मुताबिक पहले 33 सवाल पूछे जाते थे, जबकि इस बार 40 सवालों के जवाब लिए जाएंगे। एक परिवार की जानकारी दर्ज करने में करीब 45 मिनट से एक घंटे तक लग सकता है। इसी वजह से आबादी की गणना के लिए 35 दिन का समय रखा गया है। प्रगणक परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम, मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि या उम्र, वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति या जनजाति की जानकारी, माता-पिता का विवरण, दिव्यांगता, मातृभाषा, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, प्रवास और जन्मस्थान समेत कई जानकारियां दर्ज करेंगे। डिजिटल साक्षरता, बैंक खाते और उपलब्ध होने पर मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट तथा ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारियां भी सवालों में शामिल हैं। जनगणना निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक मकान सूचीकरण के दौरान बनाए गए जनगणना ब्लॉक अस्थायी थे। अब वहां रहने वाली आबादी और मकानों की वास्तविक स्थिति के आधार पर नए ब्लॉक तैयार किए जाएंगे। अनुमान है कि ब्लॉक्स की संख्या में 10 से 20 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही प्रगणकों और अन्य कार्मिकों की संख्या भी इसी अनुपात में बढ़ाई जा सकती है। मकान सूचीकरण के दौरान करीब 20 हजार प्रगणक, 3500 सुपरवाइजर और 3000 रिजर्व कर्मचारी लगाए गए थे। आबादी की गणना में प्रगणक, सुपरवाइजर और रिजर्व कर्मचारियों समेत करीब 35 हजार कर्मियों के तैनात होने की संभावना है। आबादी की गणना पूरी होने के बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण दौर चलेगा। इस दौरान प्रगणक दोबारा घर-घर जाकर यह जांचेंगे कि किसी परिवार में कोई सदस्य बढ़ा या घटा तो नहीं है। 4 और 5 जनवरी की मध्यरात्रि को ‘सेंसस मूवमेंट’ माना जाएगा और 5 जनवरी 2027 रात 12 बजे को जनगणना की रेफरेंस डेट माना जाएगा। सैन्य और अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना के लिए अलग व्यवस्था होगी। बीआरओ, आईटीबीपी, एसएसबी समेत संबंधित संगठनों के नोडल अधिकारी अपने प्रगणक और सुपरवाइजर नियुक्त करेंगे। जवानों की जानकारी सुरक्षा कारणों से ऑफलाइन जुटाकर सुरक्षित तरीके से केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। जवानों के परिवारों से सामान्य आबादी की तरह 40 सवाल पूछे जाएंगे। जनगणना निदेशालय के मुताबिक 15 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच प्रगणकों और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण जिलों में शुरू किया जाएगा। ऐसे में दिसंबर से शुरू होने वाला यह अभियान प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर को नए सिरे से सामने लाने वाला महत्वपूर्ण आंकड़ा साबित होगा।