आगरा के अंधे बुजुर्ग का NDA दावा, राष्ट्रीय बहस छिड़ी

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आगरा। सोशल मीडिया के दौर में एक वीडियो कैसे किसी की जिंदगी बदल सकता है, इसका ताजा उदाहरण आगरा के न्यू आगरा क्षेत्र के नगला पदी इलाके में रहने वाले करीब 80 वर्षीय संतोष गोयल की कहानी है। कुछ ही दिनों पहले तक गुमनामी में जीवन गुजार रहे संतोष गोयल आज हर तरफ चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी फर्राटेदार अंग्रेजी, जीवन की अनकही दास्तान और संघर्ष की कहानी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल 2 अप्रैल को उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा ने रिकॉर्ड किया था। वीडियो में संतोष गोयल ने अपने जीवन के उन पहलुओं को साझा किया, जिनमें उन्होंने दावा किया कि वे वर्ष 1971 में अंग्रेजी विषय में पीएचडी कर चुके हैं और पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं। उनका कहना है कि वे आर्मी एजुकेशन कोर से जुड़े रहे और उनके पढ़ाए हुए कई छात्र आज भारतीय सेना में उच्च पदों लेफ्टिनेंट से लेकर जनरल तक पर देश की सेवा कर रहे हैं। हालांकि उनकी जिंदगी का रुख उस समय बदल गया जब उनकी आंखों की रोशनी चली गई। संतोष गोयल का दावा है कि इसी कारण उन्हें नौकरी से हटा दिया गया और वे अपनी सेवा के 15 वर्ष पूरे नहीं कर सके। उनके अनुसार अगर वे सेवा पूरी कर पाते तो आज उन्हें सम्मानजनक पेंशन मिल रही होती। लेकिन हकीकत यह है कि आज वे बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। न तो उन्हें ठीक से दिखाई देता है और न ही उनके दांत हैं, जिससे उन्हें खाने-पीने में भी परेशानी होती है। पेट भरने के लिए वे पास के एक मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग ढोकला और लड्डू पर निर्भर हैं। इधर, संतोष गोयल के दावों को लेकर स्थानीय स्तर पर संदेह भी बना हुआ है।

पड़ोसियों का कहना है कि वे वर्षों से उन्हें इलाके में देख रहे हैं, लेकिन उनके एनडीए में पढ़ाने के दावे की पुष्टि किसी के पास नहीं है। यहां तक कि जिस मकान में वे रहते हैं, वहां के लोग भी उनसे किसी तरह का पारिवारिक संबंध होने से इनकार करते हैं। ऐसे में उनकी कहानी जितनी संवेदनशील है, उतनी ही रहस्यमयी भी बन गई है। वीडियो के वायरल होने के बाद न केवल स्थानीय लोग, बल्कि मीडिया भी संतोष गोयल की कहानी जानने के लिए उनके पास पहुंचने लगा। इस बीच भारतीय सेना ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। रविवार को सेना के जवान संतोष गोयल के पास पहुंचे और उन्हें अपने साथ कमांड हॉस्पिटल ले गए। बताया जा रहा है कि वहां उनकी आंखों का इलाज कराया जा रहा है और साथ ही उनके दावों की सत्यता की जांच भी शुरू कर दी गई है। अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि संतोष गोयल की कहानी कितनी सच्ची है। क्या वे वास्तव में एनडीए के शिक्षक रहे हैं, या फिर यह एक अधूरी और उलझी हुई कहानी है, जिसका सच अभी सामने आना बाकी है। फिलहाल यह घटना न केवल एक बुजुर्ग के संघर्ष को सामने लाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सोशल मीडिया की ताकत किसी अनदेखे व्यक्ति को अचानक सुर्खियों में ला सकती है। जो भी हो, इस वायरल वीडियो ने संतोष गोयल के जीवन में एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सामने आने वाला सच उनके जीवन को किस दिशा में ले जाता है क्या उन्हें वह पहचान और सम्मान मिलेगा, जिसका वे दावा करते हैं, या फिर यह कहानी किसी और मोड़ पर खत्म होगी।