उत्तराखंड में मुख्यमंत्री की घोषणाओं को धरातल पर उतारने की कयावद तेज हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट संदेश दिया कि घोषणाएं सिर्फ फाइलों में बंद न रहें, बल्कि समयसीमा के भीतर पूरी हों। यमुनोत्री ट्रैक के सुधारीकरण से लेकर शहरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण तक, सरकार अब नतीजों पर केंद्रित नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं को धरातल पर उतारने की रफ्तार बढ़ाने के लिए शासन ने अब लंबित मामलों की निगरानी और तेज कर दी है। मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मुख्यमंत्री घोषणाओं की विभागवार प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर तय समयसीमा में पूरा किया जाए। लंबे समय से लंबित घोषणाओं के निस्तारण में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो और विभागों के बीच समन्वय की कमी काम में बाधा न बने। समीक्षा बैठक में सामने आया कि प्रदेश में अब तक कुल 4611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2852 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं 1759 घोषणाएं विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। इनमें 1397 घोषणाओं पर कार्रवाई चल रही है, जबकि 59 घोषणाएं आंशिक रूप से पूरी की जा चुकी हैं। इसके अलावा 303 घोषणाएं अभी भी लंबित हैं। 447 घोषणाओं का विलोपन या दूसरी घोषणाओं में विलय किया जा चुका है। मुख्यमंत्री घोषणाओं की निगरानी में प्रगति का एक महत्वपूर्ण आंकड़ा यह भी रहा कि 11 अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक में लंबित घोषणाओं की संख्या 627 थी। अब यह संख्या घटकर 303 रह गई है। मुख्य सचिव ने विभागवार लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शेष घोषणाओं के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि हस्तांतरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए। विभागों को आपसी तालमेल के साथ ऐसी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने और जहां संभव हो, संबंधित कार्यों को समानांतर रूप से शुरू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यमुनोत्री यात्रा मार्ग से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने यमुनोत्री के पूरे ट्रैक रूट के सुधारीकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को अगले 15 दिनों में इसका विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने को कहा गया है। साथ ही ट्रैक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए गए हैं। यमुनोत्री धाम तक पहुंचने वाला ट्रैक तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में पूरे मार्ग के सुधार की योजना को सुरक्षा, सुविधा और यात्रा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्य सचिव ने पौड़ी में धारा रोड से एजेंसी चौक तक प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट के कार्य को आवास विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। मल्टीस्टोरी पार्किंग से जुड़े प्रस्ताव पर भी जल्द कार्रवाई करने को कहा गया। इसके साथ ही शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क और ईको पार्क विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए। कोल्ड स्टोरेज निर्माण के लिए भूमि चयन पर भी मुख्य सचिव ने विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने अनुपयुक्त सरकारी भूमि पर निर्माण करने के बजाय आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त भूमि क्रय कर परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए। सचिव और अपर सचिव स्तर पर भी इसकी गंभीरता से निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर के मध्य में प्रस्तावित है। समीक्षा का संदेश साफ है कि घोषणाओं की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उनका समयबद्ध क्रियान्वयन है। 627 से 303 तक लंबित घोषणाओं की संख्या कम हुई है, लेकिन अब शेष मामलों के निस्तारण की चुनौती सामने है। खासकर भूमि, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में तेजी लाकर सरकार इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

