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माउंट किलिमंजारो पर लहराया देवभूमि का परचम, नन्हें रियांश और प्रिशा ने रचा इतिहास,सीएम धामी ने थपथपाई पीठ

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अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची और दुर्गम चोटी ‘माउंट किलिमंजारो’ को अपने बुलंद हौसलों से फतह कर उत्तराखंड के नन्हें पर्वतारोहियों ने नया इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देहरादून लौटे मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। 

उम्र छोटी, लेकिन हौसले आसमान से भी ऊंचे। अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण कर उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद देहरादून लौट आए हैं। दोनों होनहार बच्चों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने दोनों को उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटी का सफल आरोहण करना सामान्य उपलब्धि नहीं है। यह दोनों बच्चों के साहस, दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करने की क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रियांश और प्रिशा ने अपनी उपलब्धि से न केवल अपने परिवार और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है, बल्कि उत्तराखंड के हजारों बच्चों और युवाओं के सामने प्रेरणा की नई मिसाल भी पेश की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण की धरती के रूप में भी देश-दुनिया में पहचान मिली है। प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। पर्वतारोहण, खेल और अन्य साहसिक गतिविधियों में उत्तराखंड की युवा प्रतिभाएं लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि रियांश और प्रिशा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे कम उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। माउंट किलिमंजारो का आरोहण उनके लिए केवल एक पर्वत की चोटी तक पहुंचना नहीं, बल्कि मुश्किलों को चुनौती देकर लक्ष्य हासिल करने का संदेश है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। खेल, पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों में प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है। रियांश और प्रिशा की उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बड़ी मंजिल के लिए उम्र नहीं, बल्कि हौसला और संकल्प मायने रखता है। किलिमंजारो की चोटी पर उत्तराखंड का परचम लहराने वाले इन नन्हे पर्वतारोहियों की कहानी प्रदेश के बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला दे रही है।