उत्तराखंड में 19 लाख मतदाताओं को नोटिस पर सियासी संग्राम, कांग्रेस ने उठाए सवाल,सरकार बोली- यह सामान्य प्रक्रिया

Blog
 Image

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही राज्य का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। 8 जून से 7 जुलाई तक चले पहले चरण के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। प्रदेश के कुल 71.33 लाख मतदाताओं में से करीब 27 फीसदी यानी 19,04,380 मतदाताओं की दी गई जानकारियों में गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा इन सभी 19 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने और जवाब मांगने की कार्रवाई के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मतदाता सूची में पाई गई त्रुटियों के आधार पर चुनाव आयोग द्वारा 19 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां कांग्रेस इसे मतदाताओं को डराने और उनके मतदान अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश बता रही है, वहीं राज्य सरकार और भाजपा इसे निर्वाचन आयोग की नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया करार दे रहे हैं। प्रदेश में 8 जून से 7 जुलाई तक एसआईआर का पहला चरण पूरा होने के बाद 14 जुलाई को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। सूची के अनुसार राज्य में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज हैं। इनमें से 19,04,380 मतदाताओं यानी लगभग 27 प्रतिशत के आवेदन और विवरण में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां पाई गईं। इन्हीं त्रुटियों के सत्यापन और सुधार के लिए संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का उद्देश्य किसी मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर कैंप लगाए जाएंगे। मैदानी क्षेत्रों में तहसील, नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी विशेष शिविर आयोजित होंगे, जहां मतदाता आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी जानकारी सही करा सकेंगे। जारी आंकड़ों के अनुसार देहरादून में सबसे अधिक 3,95,868 मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं। हरिद्वार में 3,90,312, ऊधम सिंह नगर में 3,36,164, नैनीताल में 1,88,054 और पौड़ी गढ़वाल में 1,05,945 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने हैं। इसके अलावा टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और चंपावत जिलों में भी हजारों मतदाताओं की जानकारी में त्रुटियां दर्ज की गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने आठ प्रमुख कारण बताए हैं, जिनके आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इनमें मतदाता और माता-पिता की आयु में असामान्य अंतर, भाई-बहनों की आयु में नौ माह से कम का अंतर, एक परिवार में छह से अधिक संतानों का रिकॉर्ड, स्वयं या संबंधियों के नाम में त्रुटि, मतदाता के नाम की गलत प्रविष्टि तथा पिछली एसआईआर सूची में अनमैप्ड रिकॉर्ड जैसी विसंगतियां शामिल हैं। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि 19 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजकर भय का माहौल बनाया जा रहा है, ताकि लोग जवाब देने से डरें और अपने मताधिकार का उपयोग न कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उत्तराखंड में भी अन्य राज्यों की तरह मतदाता सूची को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से हर मतदाता के अधिकार की रक्षा के लिए सक्रिय रहने का आह्वान किया है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से दर्ज हैं, जो अब राज्य के निवासी नहीं हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनकी शादी अथवा स्थायी निवास अन्य स्थान पर हो गया है, ऐसे मामलों का सत्यापन कर सूची को अद्यतन किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र मतदाताओं के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को भी भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। अब सभी की नजर नोटिस के जवाब और विशेष शिविरों की प्रक्रिया पर टिकी है। चुनाव आयोग का कहना है कि प्राप्त जवाबों और दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से लगातार उठाने की तैयारी में है। ऐसे में मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण अभियान उत्तराखंड की राजनीति में आगामी दिनों का बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।