govt-ads

मसूरी शरदोत्सव के दूसरे दिन लोक रंगों से सजी मसूरी, हिमाचल की नाटी से कश्मीर के नृत्य तक बिखरी संस्कृति

Blog
 Image


लंढौर चौक, गांधी चौक और गढ़वाल टैरेस पर कलाकारों ने बांधा समां, स्थानीय कलाकारों ने भी दी शानदार प्रस्तुतियां

मसूरी। शरदोत्सव-2026 के दूसरे दिन बुधवार को मसूरी के अलग-अलग स्थान लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आए। शहर के लंढौर चौक, गांधी चौक, गढ़वाल टैरेस और टाउनहाल में दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। उत्तराखंड के लोक कलाकारों के साथ हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और हरियाणा से पहुंचे कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर उतारा। स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों ने भी इन कार्यक्रमों का जमकर आनंद लिया। शरदोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत सुबह छह बजे आयोजित हाइब्रिड एक्सगेम फिटनेस इन मसूरी से हुई। कार्यक्रम में लोगों को फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया तथा नियमित व्यायाम और स्वस्थ रहने के टिप्स दिए गए। इसके बाद दिनभर शहर के विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला चलता रहा। गढ़वाल टैरेस पर लोक गायक राम कौशल ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने रेणुका माता के भजन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद रांसु लगे चौता, बंदोला-बंदोला, चल बीनू मेरा मुलक सहित कई लोकगीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने माहौल को पहाड़ी रंग में रंग दिया। उनके गीतों पर दर्शक भी झूमते और तालियां बजाते नजर आए। कार्यक्रम का संचालन अनिल गोदियाल और विजय बिंदवाल ने किया। वहीं गढ़वाल टैरेस पर अनिल गोदियाल की ओर से नंदादेवी राजजात यात्रा पर आधारित नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की गई। नृत्य नाटिका के माध्यम से उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया। शरदोत्सव के दूसरे दिन का सबसे आकर्षक पहलू यह रहा कि मसूरी में उत्तराखंड के साथ देश के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृति भी देखने को मिली। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से हिमाचल प्रदेश से आई कलाकारों की टीम ने गांधी चौक पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नाटी की प्रस्तुति दी। हिमाचली कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य ने पर्यटकों का विशेष ध्यान खींचा। गढ़वाल टैरेस पर इसी संस्था की ओर से कश्मीर से आए कलाकारों ने कश्मीरी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य शैली ने कार्यक्रम में कश्मीर की सांस्कृतिक झलक पेश की। गांधी चौक पर हरियाणा से आई टीम ने हरियाणवी गीतों और नृत्यों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।इस तरह शरदोत्सव के दूसरे दिन मसूरी की सड़कों और प्रमुख चौकों पर उत्तराखंड से लेकर हिमाचल, कश्मीर और हरियाणा तक की लोकसंस्कृतियां एक साथ नजर आईं। पर्यटकों के लिए यह सांस्कृतिक विविधता खास आकर्षण का केंद्र रही। गांधी चौक पर प्रमिला पंवार के झुमैलों ग्रुप ने मांगल गीत से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कलाकारों ने विभिन्न पहाड़ी नृत्यों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के पारंपरिक परिधानों को भी प्रदर्शित किया गया। कलाकारों की वेशभूषा, लोकगीत और नृत्य ने गांधी चौक के माहौल को पूरी तरह पहाड़ी रंग में रंग दिया। टाउनहाल में भी स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। स्थानीय क्लब और स्वजन शिक्षा समिति की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को जोड़े रखा। शरदोत्सव में स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने से शहर के कलाकारों में भी उत्साह देखने को मिला। शरदोत्सव के दूसरे दिन की गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। अलग-अलग स्थानों पर लोक कलाकारों को मंच देकर उत्तराखंड की संस्कृति के साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं को भी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे मसूरी आने वाले पर्यटकों को यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। दूसरे दिन सुबह फिटनेस कार्यक्रम से लेकर देर शाम तक लोकगीत, लोकनृत्य, नृत्य नाटिका और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहा। शहर के प्रमुख चौक और सांस्कृतिक स्थल दिनभर गीत-संगीत और लोक नृत्यों से गूंजते रहे।