महिला अपराध बढ़ने के बाद ऊधमसिंह नगर में पुलिस ने तेज की कार्रवाई और निगरानी

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रुद्रपुर। उत्तराखंड के औद्योगिक और सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में शामिल ऊधमसिंह नगर अब महिला और बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पुलिस और सरकारी आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि कुमाऊं मंडल में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ सबसे अधिक अपराध इसी जिले में दर्ज हो रहे हैं। लगातार सामने आ रही दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, पॉक्सो और मानव तस्करी जैसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुमाऊं मंडल पुलिस कार्यालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक निर्धारित पांच माह की अवधि में महिला अपराध के कुल 660 मामलों में से 374 मुकदमे अकेले ऊधमसिंह नगर में दर्ज किए गए। यह कुल मामलों का लगभग 56 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर नैनीताल जिला रहा, जहां 149 मामले दर्ज हुए। अन्य जिलों की तुलना में ऊधमसिंह नगर में अपराध का यह आंकड़ा काफी अधिक माना जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और पुलिस के पूर्ववर्ती आंकड़ों के अनुसार भी जिले की स्थिति चिंताजनक रही है। वर्ष 2021 की एक अवधि में यहां बलात्कार के 194 मामले दर्ज किए गए थे, जो राज्य के अधिकांश जिलों से कहीं अधिक थे। इसके अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों और नाबालिगों के साथ यौन अपराधों की संख्या भी लगातार बनी हुई है। अनैतिक देह व्यापार और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में भी यह जिला कुमाऊं क्षेत्र में सबसे आगे बताया जाता है। हाल के दिनों में रुद्रपुर क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इस मामले के बाद राज्य सरकार, महिला आयोग और पुलिस प्रशासन पर त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ गया। इसी दौरान पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भी भंडाफोड़ किया, जो नाबालिग लड़कियों को गायब कर उनका यौन शोषण और अनैतिक देह व्यापार कराने में संलिप्त था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की गई। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल ही में भूरारानी क्षेत्र में एक सौतेले पिता पर अपनी 17 वर्षीय बेटी के साथ अश्लील हरकत करने का मामला दर्ज हुआ। इस घटना ने यह चिंता भी बढ़ा दी कि बेटियां केवल सार्वजनिक स्थानों पर ही नहीं, बल्कि कई बार अपने घरों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होना, बड़े औद्योगिक क्षेत्र का विकसित होना तथा बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिकों और फ्लोटिंग आबादी की मौजूदगी अपराध बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। लगातार आने-जाने वाली आबादी के कारण अपराधियों की पहचान और निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। वहीं, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में सामाजिक बदनामी के डर से कई मामलों की शिकायत समय पर दर्ज नहीं हो पाती, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। इसके साथ ही साइबर माध्यम से होने वाले यौन अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किशोरियों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए झांसे में लेकर उनका मानसिक और शारीरिक शोषण करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने मानव तस्करी और महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए विशेष टीमें सक्रिय की हैं। राज्य महिला आयोग भी पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कठोर सजा दिलाने की दिशा में काम कर रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि भी पुलिस गश्त बढ़ाने, स्कूल-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने, बालिकाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी पुलिसिंग, त्वरित न्याय, सामाजिक जागरूकता, परिवारों की संवेदनशीलता और सामुदायिक सहभागिता को समान रूप से मजबूत करना होगा, तभी देवभूमि की बेटियां सुरक्षित माहौल में जीवन जी सकेंगी।