मसूरी। देहरादून-मसूरी मार्ग पर 13 अगस्त को 22 वर्षीय मनीष की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस की ओर से प्रथम दृष्टया मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन मृतक के परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से साफ इनकार करते हुए सुनियोजित हत्या की आशंका जताई है। सोमवार को बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगों ने मसूरी कोतवाली का घेराव कर मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की। लोगों ने कहा कि यदि जांच में हत्या की पुष्टि होती है तो आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाए। मृतक के भाई मनोज ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि मनीष एक युवती के संपर्क में था और पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में था। परिवार का दावा है कि युवती और मनीष के बीच विवाद चल रहा था। परिजनों के अनुसार 12 अगस्त की रात भी मनीष का उक्त युवती और उसके साथ मौजूद कुछ युवकों से विवाद हुआ था। आरोप है कि जीरो प्वाइंट क्षेत्र में उनके बीच हाथापाई तक हुई। इसके बाद मनीष रोज की तरह देहरादून सामान लेने के लिए निकला, लेकिन अगले दिन उसकी मौत की सूचना मिली।
छह फीट कद और छह फीट डाले को लेकर उठाए सवाल
मृतक के भाई ने पुलिस की आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मनीष की लंबाई करीब छह फीट थी और जिस वाहन के डाले से रस्सी के सहारे फांसी लगाने की बात सामने आ रही है, उसकी ऊंचाई भी लगभग इतनी ही बताई जा रही है। परिवार का कहना है कि घटनास्थल की परिस्थितियों और गले में मिली रस्सी को देखते हुए कई सवाल अनुत्तरित हैं। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मनीष ने आत्महत्या की थी या उसकी हत्या कर शव को इस तरह लटकाया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मनीष के मोबाइल फोन और उसकी गतिविधियों पर उक्त युवती का नियंत्रण रहता था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
प्रेम प्रसंग बना मानसिक दबाव की वजह
परिवार का आरोप है कि मनीष और युवती के बीच प्रेम संबंध थे और विवाह को लेकर भी बातचीत हुई थी। परिवार के अनुसार बाद में संबंधों में विवाद बढ़ गया और मनीष पर मुकदमे में फंसाने तथा अन्य तरीके से दबाव बनाने की बात सामने आई। परिजनों ने इसे मनीष की मानसिक परेशानी से जोड़ते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है। परिजनों की ओर से तहरीर में युवती सहित कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में सामने आ रहे आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार जिस युवती पर परिवार की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं, उसके नाबालिग होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में उसके संबंध में किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।
कोतवाली घेराव में उमड़ा आक्रोश
मामले को लेकर सोमवार को क्षेत्रीय लोग मृतक के परिजनों के साथ मसूरी कोतवाली पहुंचे और पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान लोगों में खासा आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 22 साल के युवक की मौत को महज आत्महत्या मानकर मामले को बंद नहीं किया जाना चाहिए। घटनास्थल, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट समेत उन सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए, जिनसे मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। पूर्व पालिका अध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि युवक की मौत को लेकर परिवार के मन में गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को हर पहलू की जांच करनी चाहिए और यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसे कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक युवा की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना जरूरी है।
न्याय नहीं मिला तो आंदोलन करेंगे
मृतक के भाई ने कहा कि परिवार अपने भाई की मौत का सच जानना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लापरवाही बरती गई या परिवार को न्याय नहीं मिला तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। परिजनों ने पुलिस से मांग की कि घटना से एक दिन पहले हुए विवाद, उसमें मौजूद लोगों, मनीष के मोबाइल फोन, उसकी आखिरी लोकेशन, कॉल डिटेल और घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों की गहनता से जांच की जाए।
फिलहाल मनीष की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और पोस्टमार्टम समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। लेकिन जिस तरह परिवार और क्षेत्र के लोग सवाल उठा रहे हैं, उससे यह मामला अब केवल एक मौत का नहीं बल्कि मौत के पीछे छिपे सच को सामने लाने की मांग का बड़ा मुद्दा बन गया है।

