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मसूरी गोलीकांड के 34 साल बाद भी सवाल बाकीरू शहीद परिवारों को दर्जे का इंतजार, 2 सितंबर को फिर उठेगी आवाज

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मसूरी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए मसूरी गोलीकांड की बरसी पर 2 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर सोमवार को एसडीएम कार्यालय में राज्य आंदोलनकारियों के साथ बैठक हुई। एसडीएम ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के साथ ही शहीद स्थल का निरीक्षण किया। बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने शहीद परिवारों के चिन्हीकरण, लंबित मांगों और शहीद स्थल के सौंदर्यीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि मसूरी गोलीकांड में कई लोगों ने उत्तराखंड राज्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, लेकिन लंबे समय बाद भी कुछ शहीद परिवारों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने ऐसे परिवारों के तत्काल चिन्हीकरण और उन्हें सम्मान व अधिकार दिए जाने की मांग की।
शहीद स्थल के सौंदर्यीकरण की घोषणा पूरी करने की मांग
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से पूर्व में शहीद स्थल के सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों को लेकर की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि शहीद स्थल केवल स्मृति स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास और बलिदान की पहचान है। इसलिए यहां प्रस्तावित कार्यों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए। बैठक में उस समय के डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी की भी गोलीकांड के दौरान हुई मौत का मुद्दा उठाया गया। आंदोलनकारियों ने उन्हें भी शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की। साथ ही कहा कि जिन राज्य आंदोलनकारियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिजनों को भी आगामी कार्यक्रम में सम्मानित किया जाए।
मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएंगी मांगें
एसडीएम मसूरी ने कहा कि 2 सितंबर का दिन मसूरी गोलीकांड के शहीदों के बलिदान को याद करने का दिन है। इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य आंदोलनकारियों की ओर से बैठक में दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मसूरी पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के समक्ष शहीद परिवारों और राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि लंबित मामलों में आवश्यक कार्रवाई हो सके। एसडीएम ने शहीद परिवारों के चिन्हीकरण के मामले में जिलाधिकारी से तत्काल संवाद करने तथा उच्च अधिकारियों से भी वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। इस मौके पर अधिषासी अधिकारी गौरव भसीन, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, भगवान सिंह धनाई, देवी गोदियाल, नरेंद्र पडियार, अनिल गोदियाल, शूरवीर भंडारी, विजेन्द्र पुडिंर, सहित कई राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।