मसूरी। गुरु नानक फिफ्थ सैंटनरी स्कूल (जीएनएफसी) ने शनिवार को अपना 57वां स्थापना दिवस उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के बीच मनाया। समारोह में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं को नृत्य, संगीत व नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा के साथ विद्यालय की शैक्षणिक और खेल उपलब्धियों का सम्मान रहा। मुख्य अतिथि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक डॉ. बी. राजेंद्र ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत समूह शबद गायन से हुआ। विद्यार्थियों ने ‘कोई बोले राम-राम, कोई खुदाय’ शबद प्रस्तुत कर आपसी सद्भाव, एकता और सर्वधर्म सम्मान का संदेश दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। स्वागत नृत्य ‘शिव वंदना’ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जबकि गढ़वाली लोकनृत्य ‘चौता की चौतवाली’ के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। पंजाब की पारंपरिक संस्कृति को गिद्दा और भांगड़ा के जरिए मंच पर उतारा गया। वाद्य संगीत और गायन की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। कनिष्ठ वर्ग के अंग्रेजी नाटक ‘मी टू वी’ के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। वहीं अंग्रेजी नाटक ‘डियर डिपार्टेड’ में हास्य-व्यंग्य के जरिए रिश्तों में बदलती संवेदनाओं पर कटाक्ष किया गया। हिंदी नाटक ‘यमराज के वरदान’ ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों ने मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल तिवारी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आईसीएसई और आईएससी परीक्षा परिणाम-2026, शैक्षणिक प्रगति, खेलकूद उपलब्धियों, नगर कीर्तन, अंतरसदनीय और अंतरविद्यालयी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को रेखांकित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. बी. राजेंद्र ने शैक्षणिक और खेलकूद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी की सराहना की। स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने कला एवं विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने आर्ट एंड क्राफ्ट, विज्ञान और अन्य विषयों पर आधारित मॉडल व आकर्षक कलाकृतियां प्रस्तुत कीं। प्रदर्शित मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, विषयों के प्रति समझ और कुछ नया सीखने की ललक दिखाई दी। प्रदर्शनी ने पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों और व्यावहारिक ज्ञान के महत्व को भी सामने रखा। मुख्य अतिथि डॉ. बी. राजेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय व्यक्तित्व निर्माण की वह भूमि है, जहां भविष्य के नागरिक तैयार होते हैं। विद्यार्थियों को जीवन में बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा के साथ अनुशासन, रचनात्मकता और जीवन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जीएनएफसी समिति के सचिव सरदार महेंद्र पाल सिंह ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में अभिभावकों को विद्यालय की प्रगति और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। समारोह में विद्यालय की शैक्षणिक परंपरा, सांस्कृतिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के प्रोफेसर डॉ. बगाड़ी गौतम, डिप्टी डायरेक्टर अस्वाथी सेलुराज, सरदारनी जशवीन कौर, असीस कौर, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ओपी उनियाल, क्रिकेट एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला, सभासद जसबीर कौर, रोटरी क्लब अध्यक्ष अश्वनी मित्तल, शिवम गुप्ता, राजन विरमानी, सरदार इंद्रजीत सिंह, सरदार त्रिलोचन सिंह, सतनाम सिंह, प्रशासनिक अधिकारी सुनील बक्शी, मुख्य अध्यापक कुलदीप सिंह त्यागी सहित शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, पूर्व छात्र-छात्राएं, अभिभावक और अन्य अतिथि मौजूद रहे।

