पहाड़ों की रानी मसूरी स्थित प्रतिष्ठित मसूरी इंटरनेशनल स्कूल (एमआईएस) का 43वां वार्षिक दिवस एवं स्थापना दिवस शुक्रवार को भव्य, गरिमामय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर माहौल में मनाया गया। पूरे दिन विद्यालय परिसर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का अद्भुत संगम देखने को मिला। छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जहां अभिभावकों को भाव-विभोर कर दिया, वहीं अतिथियों ने विद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुरूप हवन-पूजन से हुई। विद्यालय की वर्तमान एवं पूर्व छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने विश्व शांति, समृद्धि और मानव कल्याण की कामना करते हुए आहुतियां दीं। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। मुख्य समारोह का शुभारंभ प्रख्यात शिक्षाविद शांतनु प्रकाश, उनके पिता जगदीश प्रकाश, विशिष्ट अतिथि मोहित ढांग तथा श्री गंगा सभा, हरिद्वार के ट्रस्टी तन्मय वशिष्ठ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या शालू बब्बर ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और कहा कि वार्षिक दिवस केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और संस्कारों को मजबूत करने का सशक्त मंच है।समारोह का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका श्गुरु दक्षिणाश् रही। छात्राओं ने महाभारत के प्रेरक पात्र एकलव्य और गुरु द्रोणाचार्य की कथा को प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद, भावपूर्ण नृत्य और आकर्षक मंच सज्जा के माध्यम से जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में गुरु के प्रति समर्पण, त्याग, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जिस भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया, उसने सभागार में बैठे प्रत्येक दर्शक को भावुक कर दिया। नाटिका समाप्त होते ही पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। इसके बाद प्रस्तुत श्ब्रह्मांडीय नादश् ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम समारोह का दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण बना। भारतीय और पाश्चात्य वाद्ययंत्रों के अद्भुत समन्वय के साथ छात्राओं ने संगीत की ऐसी प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरु वंदना के मंत्रों का सामूहिक गायन, वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियां और अनुशासित प्रस्तुति ने ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा सभागार आध्यात्मिक अनुभूति से भर उठा। अभिभावकों ने छात्राओं की प्रतिभा और संगीत कौशल की जमकर सराहना की। प्रधानाचार्या शालू बब्बर ने सत्र 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक, खेल, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्राओं को नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक दृष्टिकोण से भी समृद्ध बना रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी इंटरनेशनल स्कूल का उद्देश्य ऐसी छात्राओं का निर्माण करना है जो ज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता के साथ समाज और देश का नेतृत्व कर सकें। मुख्य अतिथि शांतनु प्रकाश ने छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि मंच पर प्रस्तुत अनुशासन, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान यह दर्शाता है कि विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को भी समान महत्व देता है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। विशिष्ट अतिथि मोहित ढांग और तन्मय वशिष्ठ ने भी विद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि मसूरी इंटरनेशनल स्कूल शिक्षा, संस्कृति, कला और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। छात्राओं का आत्मविश्वास, मंच संचालन और रचनात्मक प्रस्तुतियां विद्यालय की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का प्रमाण हैं। समारोह के अंत में प्रधानाचार्या शालू बब्बर ने मुख्य अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्राओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वार्षिक दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यालय की समृद्ध परंपरा, उत्कृष्ट शिक्षा, भारतीय संस्कृति और छात्राओं की असीम प्रतिभा का उत्सव है।

