मसूरी। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और लगातार बढ़ता तनाव लोगों के दिल पर भारी पड़ रहा है। हृदय रोग आज दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि अनियमित दिनचर्या और अस्वस्थ खानपान के कारण हृदय स्वास्थ्य को लेकर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी का इंतजार करने के बजाय जीवनशैली में समय रहते बदलाव करना बेहद जरूरी है। मैक्स हॉस्पिटल के कार्डियक, थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. अरविंद मक्कर से हुई खास बातचीत में हृदय रोगों के बढ़ते खतरे, बदलती खानपान की आदतों, व्यायाम की जरूरत, तनाव प्रबंधन और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर चर्चा हुई। 26 वर्ष से अधिक के अनुभव वाले डॉ. मक्कर के अनुसार, दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल दवाओं और उपचार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी दैनिक आदतों में सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
80 से 90 फीसदी तक बचाव की संभावना पर जीवनशैली की अहम भूमिका
डॉ. मक्कर के अनुसार, हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में जीवनशैली में बदलाव की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्व हृदय दिवस मनाने का उद्देश्य भी लोगों को जागरूक करना है, ताकि वे अपने हृदय की सेहत को प्राथमिकता दें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, बचाव की वास्तविक संभावना व्यक्ति की उम्र, आनुवंशिकता, पहले से मौजूद बीमारियों और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करती है।
प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक और खराब खानपान बढ़ा रहे खतरा
डॉ. मक्कर ने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में लोगों की खानपान की आदतों में काफी बदलाव आया है। आज लोग पहले की तुलना में अधिक प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। इनमें अधिक नमक, संतृप्त वसा और अतिरिक्त शुगर होने पर रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे की समस्या बढ़ सकती है, जो हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारक हैं। उन्होंने बताया कि आज की चौबीस घंटे चलने वाली कार्य संस्कृति ने लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है। देर तक काम करना, अनियमित समय पर भोजन करना और पर्याप्त आराम नहीं मिलना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लोगों को ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा अत्यधिक नमक, शुगर और अस्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
इंटरनेट और वर्क फ्रॉम होम ने घटाई शारीरिक गतिविधि
डॉ. मक्कर के अनुसार, इंटरनेट, कंप्यूटर और वर्क फ्रॉम होम के बढ़ते चलन ने लोगों को लंबे समय तक एक जगह बैठकर काम करने का आदी बना दिया है। इससे शारीरिक गतिविधियां कम हुई हैं, जिसका असर केवल हृदय ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने नियमित व्यायाम की सलाह देते हुए कहा कि लोगों को सप्ताह में कम से कम पांच दिन करीब 30 मिनट तक तेज चाल से पैदल चलने या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य शारीरिक गतिविधियां करने का प्रयास करना चाहिए। नियमित गतिविधि वजन नियंत्रित रखने, रक्तचाप सुधारने और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।
तनाव को नियंत्रित करना भी दिल की सेहत के लिए जरूरी
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और व्यक्तिगत जिम्मेदारियां तनाव बढ़ा रही हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से रक्तचाप और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। डॉ. मक्कर के अनुसार, तनाव प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इसके लिए योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और परिवार के साथ समय बिताना उपयोगी हो सकता है। काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं
हृदय रोगों से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच की भूमिका अहम है। डॉ. मक्कर ने बताया कि लोगों को अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर पर नजर रखनी चाहिए। कई बार उच्च रक्तचाप और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल बिना किसी स्पष्ट लक्षण के मौजूद रहते हैं, लेकिन लंबे समय में ये हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को पहले से दवाएं लेने की सलाह दी गई है, उन्हें डॉक्टर से परामर्श किए बिना दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। कई लोग खुद को स्वस्थ महसूस करने पर दवाएं लेना छोड़ देते हैं, जबकि बीमारी के जोखिम बने रह सकते हैं। नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना गंभीर जटिलताओं की आशंका कम करने में मदद कर सकता है।
कोरोना महामारी के बाद बढ़ी हृदय स्वास्थ्य पर चर्चा
डॉ. मक्कर के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद हृदय स्वास्थ्य को लेकर लोगों की चिंता और जागरूकता बढ़ी है। महामारी के दौरान और उसके बाद कुछ लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं पर चर्चा भी अधिक हुई। हालांकि, कोरोना संक्रमण और हृदय रोगों के बीच संबंध हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना चाहिए।उन्होंने जोर दिया कि हृदय रोगों को समझने, समय पर पहचानने और उनके जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है।
सीने में दर्द और सांस फूलने पर न करें देरी
हृदयाघात के लक्षणों को पहचानना भी बेहद महत्वपूर्ण है। सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी अथवा दर्द का बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि परेशानी अपने आप ठीक हो जाएगी।डॉ. अरविंद मक्कर का संदेश है कि हृदय की देखभाल बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से शुरू होनी चाहिए। संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव पर नियंत्रण, पर्याप्त नींद और समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनाकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्व हृदय दिवस लोगों को यही याद दिलाता है कि दिल की सेहत के लिए जागरूकता के साथ व्यवहार में बदलाव लाना भी जरूरी है।

