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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जागा एमडीडीए, मसूरी में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सर्वे शुरू

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200 से अधिक होटल-रेस्तरां जांच के दायरे में आने की संभावना, सवाल—अब तक कैसे चलता रहा आवासीय नक्शे पर कारोबार? निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में

मसूरी। आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और दुकानें संचालित होने के मामले में अब मसूरी में जांच शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शहरभर में ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान के लिए सर्वे शुरू किया है, जिनके भवन आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत हैं। इस कार्रवाई के साथ ही शहर में भवनों के वास्तविक उपयोग, निर्माण स्वीकृतियों की निगरानी और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आवासीय भवनों में लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं, तो उनकी पहचान और नियमानुसार कार्रवाई पहले क्यों नहीं हो सकी?

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी के 200 से अधिक होटल और रेस्तरां जांच के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, यह संभावित संख्या है और वास्तविक स्थिति सर्वे पूरा होने के बाद ही सामने आएगी। एमडीडीए ने इस अभियान पर अब तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जताई थी चिंता

आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च 2026 को लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने आवासीय कॉलोनियों को अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के कारण व्यावसायिक क्षेत्रों में बदलने पर चिंता जताई थी।

अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में संबंधित नगर निकायों को आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, नगर आयुक्तों को विस्तृत हलफनामे दाखिल करने को कहा गया था। इसी कानूनी पृष्ठभूमि में मसूरी में शुरू हुए सर्वे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्य सचिव की सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित पेशी से पहले यह अभियान शुरू हुआ। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर प्राधिकरण क्या कदम उठाता है और शहर में भूमि उपयोग से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था बनाता है।

आवासीय नक्शे पर कारोबार, निगरानी तंत्र पर सवाल

मसूरी में पर्यटन बढ़ने के साथ होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मांग भी बढ़ी है। इसी बीच आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायतों और आरोपों ने नियोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

यदि किसी भवन का स्वीकृत नक्शा आवासीय है और उसका इस्तेमाल होटल या रेस्तरां के रूप में किया जा रहा है, तो संबंधित भवन की स्वीकृति, भूमि उपयोग और लागू भवन उपनियमों की जांच जरूरी है। लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि भवन निर्माण के समय स्वीकृति किस आधार पर दी गई, बाद में उपयोग में बदलाव हुआ तो क्या अनुमति ली गई और संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार निरीक्षण किया या नहीं।

यह जांच का विषय है कि ऐसे मामलों में कहीं निगरानी की कमी रही या नियमों के अनुपालन में लापरवाही हुई। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी या लापरवाही को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसके लिए स्वीकृति अभिलेखों, निरीक्षण रिपोर्टों और विभागीय कार्रवाई की पड़ताल आवश्यक होगी।

पर्यटन के विस्तार के बीच मास्टर प्लान का मुद्दा भी अहम

मसूरी में सीमित भूमि, संकरी सड़कों, पार्किंग की कमी और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण नियोजित विकास लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहा है। होटल कारोबारियों की ओर से भी शहर में मास्टर प्लान लागू करने की मांग उठाई गई है।

एक होटल कारोबारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि शहर में मास्टर प्लान के अभाव में निर्माण गतिविधियां अनियंत्रित तरीके से बढ़ी हैं। उन्होंने मौजूदा संपत्तियों के नियमन के लिए एकमुश्त शमन योजना लाने की मांग भी की।

हालांकि, मास्टर प्लान में देरी या नियोजन संबंधी कमियों को किसी भवन के नियमविरुद्ध व्यावसायिक इस्तेमाल का स्वतः औचित्य नहीं माना जा सकता। प्रत्येक संपत्ति की स्थिति उसके स्वीकृत नक्शे, भूमि उपयोग और लागू नियमों के आधार पर ही तय होगी। किसी भी शमन योजना पर निर्णय भी संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के अधीन होगा।

1980 से पहले के व्यावसायिक उपयोग का नियम भी जांच के दायरे में

समाचार रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मसूरी में व्यावसायिक भवन का नक्शा स्वीकृत कराने के लिए संपत्ति का 1980 से पहले व्यावसायिक उपयोग में होना एक महत्वपूर्ण शर्त मानी जाती है। पर्यटन कारोबार में वृद्धि के साथ कुछ संपत्तियों को पहले आवासीय स्वीकृति लेकर बाद में होटल या रेस्तरां में बदलने के आरोप भी सामने आए हैं।

ऐसे में सर्वे के दौरान यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित भवनों को किस श्रेणी में स्वीकृति दी गई थी, क्या उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई और वर्तमान में वे किन नियमों के तहत संचालित हो रहे हैं। 1980 से संबंधित नियम की सटीक प्रयोज्यता और संभावित अपवादों की पुष्टि एमडीडीए के लागू उपनियमों तथा अभिलेखों से की जानी चाहिए।

सर्वे के बाद कार्रवाई या केवल पहचान तक सीमित रहेगा अभियान?

एमडीडीए के सर्वे से शहर में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के बीच अंतर वाले मामलों की पहचान होने की उम्मीद है। लेकिन अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि सर्वे के बाद क्या कार्रवाई होती है, भवनों की स्थिति की जांच कितनी पारदर्शी रहती है और नियमों के उल्लंघन पर समान रूप से कार्रवाई की जाती है या नहीं।

प्राधिकरण के सामने एक ओर नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर प्रत्येक मामले की सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और कानून के अनुरूप निर्णय लेने की आवश्यकता भी है। साथ ही, यदि पूर्व में निगरानी या कार्रवाई में कोई कमी रही है, तो उसकी भी अभिलेखों के आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए।

अब मसूरी में सवाल केवल यह नहीं है कि कितने होटल और रेस्तरां आवासीय भवनों में चल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि ऐसे मामलों की समय रहते पहचान और निगरानी क्यों नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ सर्वे एमडीडीए की कार्यप्रणाली, भवन स्वीकृति व्यवस्था और शहर के नियोजित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।