मसूरी चमन एस्टेट के पास जंगल में निर्माण से मचा हड़कंप, नोटिफाइड क्षेत्र में लोहे का ढांचा खड़ा होने पर उठे सवाल

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मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव और अनियंत्रित निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मसूरी के चमन एस्टेट क्षेत्र के समीप घने जंगल के बीच कथित रूप से लोहे का ढांचा खड़ा कर निर्माण कार्य किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा है, वह नोटिफाइड एरिया बताया जा रहा है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण बिना निर्धारित अनुमति के नहीं किया जा सकता। मामला तब प्रकाश में आया जब स्थानीय लोगों और मीडिया ने जंगल के बीच चल रहे निर्माण कार्य की जानकारी सार्वजनिक की। इसके बाद संबंधित विभागों में हलचल मच गई और जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।
जंगल के बीच निर्माण, विभागों को नहीं थी जानकारी!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चमन एस्टेट के पास वन क्षेत्र के बीच लोहे का बड़ा ढांचा तैयार किया जा रहा था। निर्माण कार्य कई दिनों से चल रहा था, लेकिन न तो इसकी भनक मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को लगी और न ही वन विभाग ने समय रहते कोई कार्रवाई की। लोगों का कहना है कि यदि मीडिया इस मामले को उजागर नहीं करता तो निर्माण कार्य और आगे बढ़ जाता। इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर इतनी संवेदनशील भूमि पर निर्माण गतिविधियां विभागों की नजर से कैसे बच गईं।
नोटिफाइड क्षेत्र में निर्माण पर बड़ा सवाल
जानकारों के अनुसार यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील और नोटिफाइड क्षेत्र की श्रेणी में आता है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए कड़े नियम लागू होते हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन दिनों कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर एनओसी जारी करने का खेल चल रहा है, जिसके कारण वन संपदा और पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है। उनका कहना है कि मसूरी और आसपास के कई क्षेत्रों में इसी तरह के निर्माण कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहे हैं।
मीडिया के सवालों के बाद हरकत में आया वन विभाग
मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई का दावा किया है। मसूरी वन प्रभाग के रेंज अधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि विभागीय टीम मौके पर पहुंच चुकी है और फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे और पूरे मामले की जांच कराएंगे। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी भी प्रकार की अनुमति या एनओसी गलत तरीके से जारी की गई है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाएगा। रेंज अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया गया तो तैयार किए गए ढांचे को भी ध्वस्त किया जाएगा।
एमडीडीए भी कर रहा कार्रवाई का दावा
वहीं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। यही कारण है कि स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अवैध निर्माण के मामलों में अक्सर कार्रवाई की बात तो होती है, लेकिन जमीन पर उसका असर दिखाई नहीं देता।
कंक्रीट के जंगल में बदलती जा रही है मसूरी
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है कि मसूरी धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती जा रही है। बढ़ते निर्माण, पेड़ों की कटाई और पहाड़ियों पर बढ़ते दबाव के कारण प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि नगर पालिका, वन विभाग और विकास प्राधिकरण के बीच समन्वय की कमी तथा कथित अनियमितताओं के चलते संवेदनशील क्षेत्रों में भी निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिल रहा है।
फर्जी प्लेंथ और नक्शा पास करने के आरोप
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में कथित रूप से फर्जी प्लेंथ प्रमाणपत्र और विवादित नक्शों के आधार पर निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो मसूरी की पर्यावरणीय पहचान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नागरिकों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि अवैध निर्माण और कथित अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी तो वे इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।