मसूरी में अवैध निर्माण पर एमडीडीए का बड़ा एक्शन, गलोगीधार में निर्माण सील, फिर भी नहीं थम रहा नियमों का उल्लंघन

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मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के दावों के बीच मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शुकवार को गलोगीधार क्षेत्र में एक निर्माणाधीन भवन को सील कर बड़ी कार्रवाई की। हालांकि यह कार्रवाई एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा करती है कि नोटिस, सुनवाई और कार्य रोकने के आदेशों के बावजूद शहर में अवैध निर्माण आखिर लगातार कैसे जारी हैं। गलोगीधार, मसूरी-देहरादून मोटर मार्ग पर नितिन खन्ना के निर्माणाधीन भवन को सील किया गया। कार्रवाई संयुक्त सचिव/एसडीएम मसूरी के निर्देश पर पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। मौके पर सहायक अभियंता अजय मलिक, ने बताया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा बिना स्वीकृति लगभग 7×8 मीटर क्षेत्र में आरसीसी कॉलम खड़े कर शटरिंग का कार्य किया जा रहा था। निर्माण को लेकर पहले ही धारा 27 एवं 28 के तहत कारण बताओ नोटिस और कार्य रोकने का आदेश जारी किया गया था। नोटिस 27 जुलाई को तामील कराया गया और 30 जुलाई को सुनवाई की तिथि तय की गई, लेकिन निर्माणकर्ता न तो सुनवाई में उपस्थित हुआ और न ही कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया। निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नोटिस के बावजूद चोरी-छिपे निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया। प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार निर्माण स्थल गलोगी पावर हाउस कटान क्षेत्र के सामने घाटी की ओर स्थित है। यदि यहां निर्माण जारी रहता तो मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग के कटाव का खतरा बढ़ सकता था। इसी गंभीर आशंका को देखते हुए भवन को सील करना आवश्यक माना गया। एमडीडीए ने अपने आदेश में सर्वाेच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावर्मन, कनीज अहमद बनाम साबुद्दीन तथा राजेंद्र कुमार बरजात्या सहित विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेशों का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
कार्रवाई के बावजूद बड़ा सवाल
गलोगीधार में हुई यह सीलिंग कार्रवाई जहां एमडीडीए की सख्ती को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह भी सवाल उठाती है कि मसूरी और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध निर्माण समय रहते क्यों नहीं रुक पा रहे हैं। नोटिस मिलने और कार्य रोकने के निर्देश के बाद भी यदि निर्माण जारी रहता है, तो निगरानी व्यवस्था और प्रवर्तन तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूस्खलन और भू-कटाव की दृष्टि से संवेदनशील मसूरी में अनियंत्रित निर्माण न केवल पर्यावरण बल्कि सड़क सुरक्षा और स्थानीय लोगों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में केवल सीलिंग की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लगातार निगरानी, समय पर हस्तक्षेप और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई भी आवश्यक है। इस मौके पर अवर अभियंता अनुराग नौटियाल, सुपरवाइजर इंदरदेव नौटियाल सहित प्राधिकरण की टीम मौजूद रही।