सर्वे मैदान से गांधी चौक तक निकली भव्य शोभायात्रा, विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति के साथ उत्तराखंड की झांकियों ने मोहा मन
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में 12 साल के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को शरदोत्सव की पुरानी रौनक लौट आई। सर्वे मैदान से निकली भव्य शोभायात्रा में देशभर की विविध संस्कृति के रंग देखने को मिले। बारिश के बीच भी कलाकारों और स्थानीय लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य और लोक कला की प्रस्तुतियां देकर मालरोड को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। शोभायात्रा सर्वे मैदान से शुरू होकर मालरोड होते हुए गांधी चौक पहुंची। इसमें बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक ने उत्साह के साथ भाग लिया। रास्तेभर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए जुटी रही। अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और संगीत ने लोगों को देश की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया।
गांधी-इंद्रमणि बडोनी पर आधारित झांकी रही आकर्षण
शोभायात्रा में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और विरासत को दर्शाती झांकियां भी शामिल रहीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उत्तराखंड के जननायक इंद्रमणि बडोनी के जीवन एवं विचारों पर आधारित झांकी ने लोगों का विशेष ध्यान खींचा। झांकी के माध्यम से उत्तराखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक और जनआंदोलनों से जुड़ी विरासत को प्रदर्शित किया गया। लोगों ने झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की।
बारिश बनी बाधा, मुख्यमंत्री का दौरा रद्द होने से मायूसी
शरदोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को भी शामिल होना था, लेकिन मसूरी में खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण मुख्यमंत्री का दौरा रद्द हो गया। उनके कार्यक्रम में नहीं पहुंचने से लोगों और आयोजकों में कुछ मायूसी भी देखने को मिली। हालांकि, इसके बावजूद शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्साह कम नहीं हुआ। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने संयुक्त रूप से शरदोत्सव का शुभारंभ किया।
12 साल बाद फिर जीवंत हुई परंपरा
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन के अनुसार केदारनाथ आपदा के बाद मसूरी में शरदोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया था। करीब 12 साल के अंतराल के बाद नगर पालिका बोर्ड के प्रयासों से इस सांस्कृतिक आयोजन को दोबारा शुरू किया गया है। लंबे समय बाद आयोजित हो रहे उत्सव को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भी उत्साह है।
80 प्रतिशत अवसर स्थानीय कलाकारों को
इस बार शरदोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी गई है। पालिका प्रशासन के अनुसार करीब 80 प्रतिशत अवसर स्थानीय कलाकारों को दिए गए हैं। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोककला, पारंपरिक परिधान, स्थानीय विरासत और पहाड़ी व्यंजनों को भी आयोजन में प्रमुख स्थान दिया गया है। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कलाकार मसूरीवासियों और पर्यटकों के सामने अपनी-अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।
पांच दिन तक चलेगा सांस्कृतिक रंग
पांच दिवसीय शरदोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, मनोरंजक और लोककलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय कलाकारों के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इससे पर्यटकों को जहां उत्तराखंड की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा, वहीं देश की विविध लोक परंपराओं से भी रूबरू होने का मौका मिलेगा।
पहाड़ी व्यंजन और उत्पाद भी होंगे आकर्षण
शरदोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ फूड फेस्टिवल भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसमें पहाड़ी पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय उत्पाद लोगों को उपलब्ध होंगे। आयोजकों का उद्देश्य पहाड़ी खानपान और स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि 12 साल बाद शरदोत्सव की वापसी मसूरी के लिए खास अवसर है। प्रयास है कि इस मंच के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, संस्कृति और पहाड़ी उत्पादों को व्यापक पहचान मिले। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने भी आयोजन को मसूरी की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। बारिश के बीच निकली शोभायात्रा ने साफ कर दिया कि मौसम की चुनौती भी मसूरी के लोगों और कलाकारों के उत्साह को नहीं रोक सकी। लंबे अंतराल के बाद लौटे शरदोत्सव ने शहर को एक बार फिर कला, संस्कृति, लोक परंपरा और पर्यटन के रंग में रंग दिया है। इस मौके पर एसएसपी देहरादून परमेन्द्र सिंह डोभाल, एसडीएम मसूरी राहुल आनंद, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन मोहन सिंह मल्ल, ओपी उनियाल, नेहा जोशी, आर्यन देव उनियाल, अमित भटट, गौरी थपलियाल, शिवानी भारती, रणबीर कंडारी, विषाल खरोला, रूपचंद गुरूजी, अनिल गोयल, अनिता धनाई, विजय रमोला सहित कई लोग मौजूद थे।

