मसूरी में फिल्म इंडस्ट्री का दर्द, ‘फिल्म बोर्ड नहीं बना तो खत्म हो जाएगा उत्तराखंड का सिनेमा’

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पर्यटन नगरी मसूरी में आयोजित पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड फिल्म, टेलीविजन एवं रेडियो एसोसिएशन ने प्रदेश की फिल्म इंडस्ट्री की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष प्रदीप भंडारी और महामंत्री कांता प्रसाद ने कहा कि फिल्म बोर्ड के गठन में देरी से पूरी इंडस्ट्री संकट में है।उन्होने ने कहा कि राज्य सरकार ने फिल्म नीति तो बनाई है, लेकिन उसका जमीनी स्तर पर सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा। इसका सीधा असर कलाकारों, निर्माताओं और निर्देशकों पर पड़ रहा है, जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। एसोसिएषनन ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं को मिलने वाली 50ः सब्सिडी नहीं मिल रही। पिछले 10 वर्षों से पुरस्कार राशि (करीब 50 लाख रुपये) का वितरण लंबित है इससे कलाकारों का मनोबल लगातार गिर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई क्षेत्रीय फिल्म रिलीज होती है बड़े सिनेमा हॉल उन्हें स्क्रीन ही नहीं देते, जिससे फिल्में दर्शकों तक पहुंच ही नहीं पातीं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बाहरी (बॉलीवुड) फिल्मों को ज्यादा सुविधा और सब्सिडी दे रही है जबकि स्थानीय कलाकार और निर्माता उपेक्षा का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में फिल्म उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन उत्तराखंड में यह बंद होने की कगार पर है। एसेासिएषन ने सरकार से मांग की जल्द से जल्द फिल्म बोर्ड का गठन किया जाए।फिल्म उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। लंबित सब्सिडी और पुरस्कार राशि तत्काल जारी की जाए। उनका कहना है कि फिल्म बोर्ड बनने से ही नीतियों का सही क्रियान्वयन हो सकेगा और स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री को नई दिशा मिलेगी। इस मौके पर प्रचार सचिव नागेन्द्र प्रसाद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा0 अमरदेव गोदियाल, कोषाध्यक्ष प्रमोद बेलवाल, सहसचिव नन्दन सिंह कंडारी, सलाहकार संयोजक जसपंवार जस्सी, श्रीमती कमलेश भण्डारी आदि उपस्थित थे।