होमगार्ड की तर्ज पर मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता देने की मांग, 2021-22 में 300 दिन रोजगार की घोषणा के बाद भी शासनादेश जारी नहीं होने पर जताई नाराजगी
मसूरी। प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) हित संगठन उत्तराखंड ने जवानों की दो सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शासनादेश जारी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रदेशभर में पीआरडी जवान पुलिस, यातायात, सुरक्षा व्यवस्था से लेकर चारधाम यात्रा, कुंभ मेला, चुनाव और आपातकालीन सेवाओं समेत विभिन्न विभागों में जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें वर्षभर नियमित रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इससे जवानों के सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट बना हुआ है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत और प्रदेश महासचिव बीर सिंह रावत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि पीआरडी जवानों को वर्ष में 365 दिन नियमित रोजगार दिया जाए। साथ ही होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) भी दिया जाए।
2021-22 की घोषणा का अब तक इंतजार
संगठन ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2021-22 में पीआरडी जवानों को न्यूनतम 300 दिन रोजगार देने की घोषणा की थी। इसके बाद शासन और निदेशालय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्राचार भी किया गया, लेकिन घोषणा के करीब चार-पांच वर्ष बीतने के बावजूद शासनादेश जारी नहीं हो सका है। जवानों का कहना है कि रोजगार की अनिश्चितता के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जवान लंबे समय से विभाग के साथ सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन साल में पर्याप्त कार्यदिवस नहीं मिलने के कारण उनकी आय प्रभावित होती है। छह अप्रैल की बैठक में प्रस्ताव तैयार करने के दिए गए थे निर्देश
संगठन के अनुसार छह अप्रैल 2026 को विभागीय मंत्री रेखा आर्य की अध्यक्षता में विभागीय सचिव, अधिकारियों और संगठन के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। बैठक में जवानों की दो सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई और विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को मांगों के संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे। संगठन का कहना है कि उस समय जल्द प्रस्ताव कैबिनेट में रखने का आश्वासन भी दिया गया था। इसके बावजूद अब तक दोनों मांगों को लेकर शासनादेश जारी नहीं होने से जवानों में निराशा है। संगठन ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर लंबित प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने की मांग की है।
सुरक्षा से लेकर चुनाव ड्यूटी तक निभाते हैं जिम्मेदारी
पीआरडी संगठन का कहना है कि प्रदेश के जवान विभिन्न परिस्थितियों में सरकार और प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस थाना-चौकी, यातायात व्यवस्था, कोविड-19 जैसी आपातकालीन परिस्थितियों, चारधाम यात्रा, कुंभ मेला और चुनाव ड्यूटी में जवानों की सेवाएं ली जाती हैं। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों में अनुसेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर और वाहन चालक समेत अन्य जिम्मेदारियां भी पीआरडी जवान निभाते हैं। संगठन का तर्क है कि जब जरूरत पड़ने पर जवानों से लगातार सेवाएं ली जाती हैं तो उनके लिए रोजगार की स्थायी और सम्मानजनक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दो मांगों पर शासनादेश की मांग
संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पीआरडी जवानों को वर्षभर 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जाए और होमगार्ड की तर्ज पर मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता लागू किया जाए। संगठन ने चेतावनी नहीं, बल्कि सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताते हुए कहा कि मांगों का शासनादेश जारी होने से प्रदेश के हजारों पीआरडी जवानों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकेगी। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पीआरडी जवान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर विभाग और सरकार को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराते रहे हैं। अब उन्हें आश्वासन के बजाय शासनादेश का इंतजार है।
