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दो सितंबर को फिर गूंजेगा मसूरी गोलीकांड के शहीदों का स्मरण, भव्य होगा शहीद सम्मान समारोह

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शहीद स्थल पर आयोजित होगा मुख्य कार्यक्रम, शहीदों के परिजनों को किया जाएगा सम्मानित; लोकगीत, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

मसूरी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मसूरी में हुए गोलीकांड की बरसी पर इस वर्ष दो सितंबर को शहीदों की स्मृति में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों के साथ मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलन की पीड़ा, संघर्ष और राज्य निर्माण के लिए दिए गए बलिदान को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से याद किया जाएगा।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर एसडीएम कार्यालय में एसडीएम मसूरी राहुल आनंद और नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम को भव्य और गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित करने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। तय किया गया कि दो सितंबर को शहीद स्थल पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, आंदोलनकारियों, शहीद परिवारों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

शहीद परिवारों का होगा सम्मान

कार्यक्रम में मसूरी गोलीकांड और उत्तराखंड आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिवारों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि राज्य निर्माण के संघर्ष में जिन लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी स्मृति को जीवित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में उत्तराखंड आंदोलन की संघर्षगाथा को लोकगीतों, नाटकों और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी प्रस्तुत किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के इतिहास और शहीदों के बलिदान से रूबरू कराना होगा।

'राज्य निर्माण के संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता'

एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण में शहीदों, आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दो सितंबर का दिन केवल एक कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर नहीं, बल्कि उन सभी लोगों को याद करने का दिन है, जिनके संघर्ष और बलिदान से उत्तराखंड राज्य का निर्माण संभव हुआ।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं और शहीद परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सम्मान देते हैं। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ आंदोलनकारियों के योगदान को भी सम्मानित किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

बारिश को देखते हुए शहीद स्थल पर विशेष इंतजाम

सितंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल पर विशेष व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। शहीद स्थल को वाटरप्रूफ टेंट से तैयार किया जाएगा, ताकि बारिश के बावजूद श्रद्धांजलि कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन प्रभावित न हों। स्थल को आकर्षक ढंग से सजाने के साथ बैठने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।

राजनीतिक मंच नहीं, शहीदों को समर्पित रहेगा कार्यक्रम

एसडीएम राहुल आनंद ने लोगों से अपील की कि दो सितंबर के कार्यक्रम को राजनीति से दूर रखते हुए इसे शहीदों और आंदोलनकारियों को समर्पित रखा जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन में बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि और उनके परिजनों का सम्मान करना है। सभी पक्षों और संगठनों से सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो।

व्यापारिक और सामाजिक संस्थाओं से सहयोग की अपील

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मसूरी होटल एसोसिएशन, मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन, मसूरी होमस्टे संगठन समेत विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और अन्य संस्थाओं से सहयोग की अपेक्षा की गई है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अधिक से अधिक स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दें।