आपदा के घावों के बीच ‘जी उठा’ राजपुर-झड़ीपानी ट्रैक, गीता धामी की पदयात्रा बनी उम्मीद की राह

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कभी प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच के लिए पहचाना जाने वाला राजपुर-झड़ीपानी ट्रैक आज भी बीते वर्ष की आपदा के घाव समेटे हुए है। टूटी पगडंडियां, धंसे हुए हिस्से और जगह-जगह मलबा यह ट्रैक अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं, लेकिन इसी कठिन राह पर रविवार सुबह प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी ने पैदल चलकर एक बड़ा संदेश दिया “ट्रैक अभी जिंदा है, बस इसे संवारने की जरूरत है।” राजपुर से झड़ीपानी तक की यह पदयात्रा केवल एक सामान्य ट्रैकिंग नहीं थी, बल्कि उस मार्ग की वास्तविक स्थिति को महसूस करने और उसे फिर से जीवंत बनाने की एक पहल भी मानी जा रही है। उनके साथ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
ट्रैक की हकीकत, सुंदरता के बीच जोखिम
राजपुर-मसूरी ट्रैक कभी स्कूली बच्चों, पर्यटकों, अधिकारियों और ट्रैकिंग प्रेमियों का पसंदीदा रास्ता रहा है। लेकिन पिछले साल आई आपदा के बाद इसकी हालत बिगड़ गई।कई जगह पगडंडी पूरी तरह बह गई है, तो कहीं संकरी राहों पर फिसलन और ढलान खतरा पैदा कर रहे हैं। नगर पालिका ने हालात सुधारने के लिए कुछ स्थानों पर अस्थायी “बटिया” (छोटी पगडंडी) बनाकर रास्ता चलने लायक जरूर किया है, लेकिन यह सुधार अभी अधूरा है।
गीता धामी की पदयात्रारू संकेत या संयोग?
गीता धामी ने बिना किसी औपचारिक बयान के ट्रैक पूरा किया, लेकिन उनकी यह यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रास्ते में उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और ट्रैक की खामियों को करीब से देखा। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने ट्रैक में सुधार के लिए सरकार तक बात पहुंचाने का भरोसा भी दिया है।
स्थानीयों की उम्मीदें फिर जागीं
इस ट्रैक से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार इस मार्ग को ठीक कर दे, तो यह फिर से पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। स्थानीय लोग इस दौरान उनके साथ नजर आए, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मुद्दा अब फिर से प्राथमिकता में आ सकता है।
पहले भी रही है खास दिलचस्पी
यह पहला मौका नहीं है जब इस मार्ग पर सरकार के शीर्ष लोग पहुंचे हों। इससे पहले स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपनी पत्नी के साथ इस ट्रैक पर आ चुके हैं।प्रदेश के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी कई बार इस मार्ग से मसूरी तक ट्रैकिंग कर चुके हैं। गीता धामी की इस पदयात्रा ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक ट्रैक की ओर ध्यान खींचा है। अब देखना यह होगा कि क्या यह पहल केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाती है या फिर राजपुर-झड़ीपानी ट्रैक को फिर से उसकी पुरानी पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।