पहाड़ों की हल्की बारिश के बीच भी आस्था का पर्व इस्टर का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि हर बूंद ने मानो इस पावन दिन की भावना को और गहरा कर दिया। शहर के सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में ईसाई समुदाय ने बड़ी श्रद्धा के साथ प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान को याद किया। चर्च के पास्टर रैबरन विवेक साइमन चंद्र ने इस अवसर पर बताया कि ईस्टर केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक हैकृयह संदेश देता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, अंततः सत्य और अच्छाई की ही जीत होती है। उन्होंने कहा, “ईसा मसीह का पुनर्जीवित होना मानवता के लिए आशा की किरण है। यह पर्व हमें प्रेम, क्षमा और एकता का मार्ग दिखाता है। यही कारण है कि इस दिन चर्च के द्वार सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले रहते हैं, ताकि हर कोई इस संदेश को महसूस कर सके।”
प्रार्थना सभा के बाद मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन ने इस आध्यात्मिक माहौल में बच्चों की खुशियों का रंग भी घोल दिया। एसोसिएशन द्वारा आयोजित ईस्टर एग हंट प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आसपास के क्षेत्रों में छिपाए गए रंग-बिरंगे अंडों को खोजने की होड़ में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने बताया कि हर साल ईस्टर पर इस तरह के आयोजन का उद्देश्य बच्चों को इस पर्व के महत्व से जोड़ना और उनमें सकारात्मकता का भाव भरना है। “ईस्टर हमें यह सिखाता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत निश्चित है। यह 40 दिनों के उपवास और आत्मचिंतन के बाद आने वाली खुशियों का प्रतीक है,” उन्होंने कहा। ईस्टर का यह पर्व केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। यह एक ऐसा अवसर बन गया, जहां विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आए, प्रेम और सौहार्द का संदेश साझा किया और बसंत के आगमन के साथ नई उम्मीदों का स्वागत किया।

