दिल्ली पब्लिक स्कूल में मातृ दिवस बड़े ही हर्षाेल्लास, उत्साह और भावनात्मक माहौल के बीच मनाया गया। कार्यक्रम में प्री-नर्सरी से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों की माताओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। विद्यालय परिसर पूरे दिन खुशियों, मुस्कान और भावनाओं से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत गीत के साथ हुआ। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मधुर स्वागत गीत ने कार्यक्रम में मौजूद सभी माताओं का मन मोह लिया। पूरे सभागार में पारिवारिक स्नेह और सम्मान का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
मातृ दिवस समारोह में विद्यार्थियों ने अपनी माताओं को समर्पित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों द्वारा पेश किए गए मनमोहक संगीत और नृत्य कार्यक्रमों ने सभी का दिल जीत लिया। छोटे-छोटे बच्चों की मासूम अदाओं और अपनी माताओं के प्रति प्रेम से भरी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावुक बना दिया। कई माताएं अपने बच्चों की प्रस्तुति देखकर भावुक भी नजर आईं।
कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने के लिए विद्यालय की ओर से माताओं के लिए कई रोचक खेलों का आयोजन किया गया। रैम्प वॉक, न्यूज़पेपर डांस, स्टिकी डांस और गुब्बारा सफारी जैसे खेलों में माताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान माताओं का उत्साह देखने लायक था। विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय परिसर में बनाए गए सेल्फी कॉर्नर और टैटू कॉर्नर कार्यक्रम के विशेष आकर्षण रहे। यहां माताओं और बच्चों ने यादगार तस्वीरें खिंचवाईं और खुशनुमा पल बिताए। आज के दौर में बच्चों का बढ़ता झुकाव मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की ओर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसी विषय पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विद्यालय द्वारा विशेषज्ञ छमीं ळनचजं को आमंत्रित किया गया। उन्होंने माताओं को बच्चों में बढ़ रही समस्याओं जैसे आंखों की कमजोरी, नींद की कमी, सिरदर्द और मानसिक तनाव के कारणों के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के सुझाव भी दिए।कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के लिए स्वयं तैयार किए गए “टेक-अवे गिफ्ट” उन्हें भेंट किए। बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार उपहार पाकर माताओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य बीके सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि माँ बच्चे की पहली गुरु होती है और उसके संस्कार, व्यक्तित्व एवं भविष्य निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों और अभिभावकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी माताओं को उपहार एवं जलपान प्रदान किया गया। पूरा आयोजन उत्साह, उमंग और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

