सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मसूरी में एमडीडीए की कार्रवाई से बढ़ी हलचल, होमस्टे एसोसिएशन ने बैठक कर बनाई आगे की रणनीति
मसूरी। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मसूरी में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से होमस्टे और बीएनबी संचालकों को नोटिस दिए जाने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। इस मुद्दे पर मसूरी होमस्टे एसोसिएशन की बैठक एक रेस्टोरेंट के सभागार में आयोजित की गई, जिसमें संचालकों ने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि घरों में संचालित होमस्टे को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की श्रेणी में रखकर नहीं देखा जाना चाहिए। बैठक में होमस्टे संचालकों ने कहा कि मसूरी में कई परिवार अपने घरों के कुछ कमरों में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को ठहरने और भोजन की सुविधा देकर स्वरोजगार चला रहे हैं। कई लोगों ने इसके लिए बैंक से ऋण लिया है, जबकि कुछ ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाई है। ऐसे में कार्रवाई की आशंका से इन परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। संचालकों का कहना था कि होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देने का भी माध्यम हैं।
सरकार की होमस्टे योजना के तहत संचालन का दावा
एसोसिएशन की बैठक में देवी गोदियाल ने कहा कि होमस्टे और बीएनबी संचालक उत्तराखंड सरकार की पर्यटन नीति के तहत पंजीकरण कराकर अपनी इकाइयां चला रहे हैं। सरकार भी स्थानीय लोगों को अपने घरों के माध्यम से पर्यटन से जोड़ने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात करती है। इसके बावजूद होमस्टे संचालकों को नोटिस मिलने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि नियमों की स्पष्ट व्याख्या करते हुए ऐसे संचालकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
मसूरी में स्पष्ट नीति और शमन का मिले विकल्प
भाजपा मसूरी मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी में मास्टर प्लान और भू-उपयोग संबंधी प्रावधानों को लेकर स्पष्टता के अभाव में आवासीय और गैर आवासीय उपयोग के मामलों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में कार्रवाई करने से पहले नियमों की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नियमानुसार पात्र इकाइयों को कंपाउंडिंग यानी शमन का अवसर दिया जाए। अग्रवाल ने कहा कि वह व्यापारियों के साथ खड़े हैं और उनकी समस्याओं को संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा। बैठक में सुनील सोनकर मसूरी होम स्टे एसोसिएषन के सस्थापक ने कहा कि सरकार को इस मामले में जल्द ठोस नीति बनानी चाहिए। इसके लिए वन टाइम सेटलमेंट जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है, ताकि नियमों के दायरे में आने वाली इकाइयों को राहत मिल सके और स्थानीय लोगों का स्वरोजगार भी प्रभावित न हो।
एसडीएम से लेकर मुख्य सचिव तक पहुंचाएंगे बात
बैठक में तय किया गया कि होमस्टे संचालकों का प्रतिनिधिमंडल जल्द उप जिलाधिकारी मसूरी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और मुख्य सचिव से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखेगा। एसोसिएशन का कहना है कि होमस्टे और बड़े व्यावसायिक होटलों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए, जिससे नियमों का पालन भी हो और स्थानीय परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
गौरतलब है कि मसूरी में एमडीडीए की ओर से आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच और नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण की जांच के दायरे में 200 से अधिक प्रतिष्ठान होने की बात सामने आई है। वहीं, प्रशासन का रुख है कि भू-उपयोग, पंजीकरण और अग्नि सुरक्षा सहित लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। ऐसे में होमस्टे संचालक चाहते हैं कि सरकार उनके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि वैध रूप से स्वरोजगार कर रहे परिवारों और नियमों का उल्लंघन कर बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के बीच अंतर किया जा सके। बैठक में सुनील रावत, बलवीर रावत, अनुपम नेगी, नवीन गोयल, मदन गुणसोला सहित कई होमस्टे और बीएनबी संचालक मौजूद रहे।

