मसूरी। अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के तत्वावधान में नगर पालिका सभागार, मसूरी में होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, रेस्टोरेंट, कैफे और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए विशेष जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पर्यटन व्यवसायियों को नशे से जुड़े मामलों में उनकी कानूनी जिम्मेदारियों, सुरक्षा उपायों और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड को सुरक्षित, जिम्मेदार और नशामुक्त पर्यटन राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस और प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ष्होटल, होमस्टे और पर्यटन प्रतिष्ठान उत्तराखंड की पहचान हैं। यदि यहां किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों या नशे को बढ़ावा मिलता है तो इससे पूरे राज्य की छवि प्रभावित होती है। इसलिए सभी प्रतिष्ठान संचालक सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दें। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदेश में दो आधुनिक नशामुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां नशे की लत से जूझ रहे लोगों का विशेषज्ञ चिकित्सकों और काउंसलरों की देखरेख में उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों की रिकवरी रेट 80 प्रतिशत से अधिक है, जो उपचार व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को सामाजिक तिरस्कार की नहीं, बल्कि सही उपचार और परिवार के सहयोग की आवश्यकता होती है। डॉ. राजेश कुमार ने परिजनों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यदि परिवार का कोई सदस्य नशे की लत से जूझ रहा है और उसका उपचार नशामुक्ति केंद्र में चल रहा है, तो उपचार के दौरान उसे बीच में छोड़कर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या अन्य अवैज्ञानिक तरीकों का सहारा न लें। उन्होंने कहा कि कई बार परिजन इलाज अधूरा छोड़कर मरीज को दूसरे तरीकों से ठीक कराने का प्रयास करते हैं, जिससे उपचार प्रभावित होता है और मरीज दोबारा नशे की गिरफ्त में जा सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा इलाज कराया जाए, तभी बेहतर परिणाम मिलेंगे। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने होटल, होमस्टे और अन्य पर्यटन प्रतिष्ठानों के संचालकों को अतिथि सत्यापन, रिकॉर्ड संधारण, सीसीटीवी निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और मादक पदार्थों से जुड़े कानूनों की जानकारी दी। साथ ही बताया गया कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में सभी पर्यटन व्यवसायियों ने प्रशासन के साथ मिलकर मसूरी को सुरक्षित, जिम्मेदार और नशामुक्त पर्यटन स्थल बनाने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से नशे के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया जा सकता है।
एमयूएस 103 ( मसूरी नशा मुक्ति अभियान)
एमयूएस 104 ( मसूरी नशा मुक्ति अभियान)

