मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में अनियोजित और अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग पर आईटीबीपी के समीप क्यारकुली भट्टा और खेवट अधिसूचित क्षेत्र में हो रहे भारी कंक्रीट निर्माण ने पर्यावरणविदों, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि संवेदनशील वन क्षेत्र और खड़ी पहाड़ियों पर नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में भू-स्खलन और प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर मौजूद संरक्षित पेड़ों के चारों ओर पूरी तरह सीमेंट और कंक्रीट डाल दिया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पेड़ों की जड़ों तक हवा और पानी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे धीरे-धीरे पेड़ सूख सकते हैं। यह राष्ट्रीय हरित अधिकरण और सर्वाेच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि बिना पेड़ काटे उन्हें खत्म करने का यह नया तरीका अपनाया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण कानूनों की भावना के खिलाफ है।
विवादित निर्माण जिस स्थान पर किया जा रहा है, वह क्षेत्र अत्यधिक ढलान वाला माना जाता है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के नियमों के अनुसार 30 डिग्री से अधिक ढलान वाले क्षेत्रों में भारी निर्माण कार्य और पहाड़ियों की कटिंग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पहाड़ियों को काटकर बड़े-बड़े पुश्ते और कंक्रीट संरचनाएं खड़ी की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह निर्माण क्षेत्र और आसपास की आबादी के लिए खतरा बन सकता है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि मसूरी-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए गए सुरक्षा पैराफिटों को तोड़कर नीचे निर्माण स्थल तक भारी वाहनों के लिए रास्ता बनाया गया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि बिना एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की अनुमति के इस प्रकार राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा दीवारों को क्षतिग्रस्त करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इससे सड़क पर चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि पूरा क्षेत्र आरक्षित वन भूमि के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि और भारी निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री और मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि प्राकृतिक बरसाती नालों और जल निकासी मार्गों के साथ भी छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे मानसून में जलभराव और भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि मसूरी में लगातार हो रहे अनियोजित निर्माण से शहर का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से खत्म होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन और व्यवसायिक लाभ के नाम पर पहाड़ों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। लोगों ने वन विभाग, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरणऔर जिला प्रशासन से संयुक्त निरीक्षण कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रुकवाने की मांग की है। साथ ही पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

