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मसूरी विधानसभा टिकट की दौड़ में गामा ने ठोकी ताल, बोले- आखिरी गेंद तक उम्मीद बरकरार

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मसूरी। मसूरी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने अपनी दावेदारी को लेकर बड़ा संकेत दिया है। गामा ने कहा कि वह मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा को लेकर लगातार प्रयास करते रहेंगे। हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक मैच की आखिरी गेंद नहीं फेंकी जाती, तब तक चौका-छक्का लगने की उम्मीद बनी रहती है।

गामा ने कहा कि वह करीब 40 वर्षों से भाजपा के सिपाही के रूप में संगठन के लिए काम कर रहे हैं। वर्ष 2018 में पार्टी ने उन्हें देहरादून नगर निगम के मेयर पद का टिकट देकर आशीर्वाद दिया था। उन्होंने पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए चुनाव जीता। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार गामा ने वर्ष 1989 में वार्ड अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था और इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा समेत संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने जब वर्ष 2025 में सौरभ थपलियाल को टिकट दिया, तब भी उन्होंने अपनी व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर पार्टी हित को रखा और संगठन के निर्देश पर उनके लिए पूरी ताकत से काम किया। गामा ने कहा कि भाजपा में व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन सर्वोपरि है।

'टिकट किसी को मिले, कमल खिलाने के लिए एकजुट होकर करेंगे काम'

गामा ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेतृत्व मसूरी से जिसे भी प्रत्याशी बनाएगा, वह उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करना होगा।

उन्होंने कहा, "मसूरी में पहले भी कमल खिला है और आगे भी कमल खिलेगा।" भाजपा की जीत के लिए कार्यकर्ताओं की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है।

गामा ने कहा कि अब उनकी इच्छा मसूरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की है। इसके लिए वह लगातार जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में लंबे समय से काम करने के कारण संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनका मजबूत जुड़ाव है और वह अपनी इस इच्छा को लेकर आखिरी समय तक प्रयास करते रहेंगे।

मसूरी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने के बीच गामा का यह बयान आने वाले दिनों में पार्टी की अंदरूनी सियासत को और गरमा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व को ही करना है।