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मसूरी में सादगी से मना गोरखाली तीज महोत्सव, नेपाल के दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि

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मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में गोरखाली तीज महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। राधा कृष्ण मंदिर में मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गोरखाली और नेपाली समुदाय के साथ ही विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हुई। नेपाल में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए इस बार तीज महोत्सव को अपेक्षाकृत सादगी के साथ आयोजित किया गया। हालांकि, पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को निभाने में महिलाओं और समुदाय के लोगों ने कोई कमी नहीं छोड़ी। कार्यक्रम में नेपाल और गोरखाली समुदाय के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा।
मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल और महामंत्री जगजीत कुकरेजा ने बताया कि संस्था पिछले छह वर्षों से लगातार गोरखाली तीज महोत्सव का आयोजन कर रही है। इसका उद्देश्य केवल एक समुदाय के पर्व को मनाना नहीं, बल्कि मसूरी में रहने वाले विभिन्न समुदायों को एक मंच पर लाकर आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि मसूरी में सभी जाति और धर्म के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर खुशियां बांटते हैं। संस्था का प्रयास है कि सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी प्रोत्साहित किया जाए। इसी क्रम में कार्यक्रम के दौरान सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। रजत अग्रवाल और जगजीत कुकरेजा ने कहा कि नेपाल में हुए घटनाक्रम के कारण इस बार कार्यक्रम को सीमित और सादगीपूर्ण रखा गया, लेकिन गोरखाली समुदाय की धार्मिक आस्था और परंपरा को बनाए रखते हुए तीज का आयोजन किया गया। नेपाली समुदाय की कांती थापा, पूजा और ज्योति प्रसाद ने बताया कि हरितालिका तीज गोरखाली और नेपाली समाज का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं तथा भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। उन्होंने बताया कि तीज केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि नेपाली और गोरखाली समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से जुड़ा पर्व भी है। महिलाएं इस दिन पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर पूजा-अर्चना करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में पहुंचकर पर्व की रौनक बढ़ाई। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान नेपाली और गोरखाली लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। श्रद्धांजलि, पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम ने आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी दिया।