गढ़वाली लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए मसूरी के मनोज टम्टा सम्मानित

Blog
 Image


मसूरी। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, गढ़वाली भाषा और पारंपरिक गीत-संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले मसूरी के लोक कलाकार मनोज टम्टा को प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था उफतारा द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उत्तराखंड की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और गढ़वाली भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया गया। भव्य सम्मान समारोह में प्रदेश के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री मधु भट्ट, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी तथा सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान ने मनोज टम्टा को सम्मानित किया। समारोह में फिल्म, कला, पत्रकारिता एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई विशिष्ट हस्तियों को भी सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद मनोज टम्टा ने इसे अपने वर्षों के सांस्कृतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का सम्मान है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली भाषा, लोकगीत और पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित करना प्रत्येक उत्तराखंडवासी की जिम्मेदारी है और वह भविष्य में भी पूरी निष्ठा के साथ इस दिशा में कार्य करते रहेंगे। उन्होंने इस सम्मान के लिए उफतारा के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी, महामंत्री कांता प्रसाद तथा पूरी आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था लंबे समय से उत्तराखंड की बोली, भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी मनोज टम्टा की उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए विश्वास जताया कि उनका यह सम्मान युवा पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा देगा। समारोह में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहे कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान की भी सराहना की गई।