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मसूरी हिंदी दिवस पर याद किए गए कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल, प्रतिमा पर अर्पित किए पुष्प

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प्रतिमा स्थल के सौंदर्यीकरण और कविताओं का संग्रहालय बनाने की उठी मांग, अल्पायु में साहित्य को दी नई दिशा

मसूरी में हिंदी दिवस के अवसर पर पहाड़ों की रानी मसूरी में प्रख्यात कवि हेमंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान मसूरी एवं द हिल्स ऑफ मसूरी के संयुक्त तत्वावधान में मालरोड स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने अल्पायु में ही हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाली अनेक रचनाएं दीं। उनकी कविताओं में प्रकृति, पहाड़ और मानवीय संवेदनाओं की गहरी झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस के अवसर पर ऐसे साहित्यकारों को याद करना नई पीढ़ी को अपनी भाषा और साहित्य से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है। शोध संस्थान के अध्यक्ष शूरवीर भंडारी ने कहा कि संस्थान की ओर से हर वर्ष चंद्रकुंवर बर्त्वाल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्होंने मांग की कि मालरोड स्थित उनकी प्रतिमा स्थल का सौंदर्यीकरण कराया जाए। साथ ही यहां चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविताओं और साहित्यिक कृतियों को संजोने के लिए संग्रहालय या साहित्यिक केंद्र स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यहां उनकी रचनाओं का संग्रहालय बनाया जाता है तो देश-विदेश से मसूरी आने वाले पर्यटक और साहित्यप्रेमी उनके साहित्य से परिचित हो सकेंगे। इससे आने वाली पीढ़ी को भी महान साहित्यकार के जीवन और रचनाओं को समझने का अवसर मिलेगा। इस मौके पर जसबीर कौर, नरेन्द्र पडियार, हरीष कालरा, दीपक लाल, एसपी चमोली, अमित गुप्तर, अनुज गुप्ता सहित कई लोग मौजूद थे।