पहाड़ों की रानी मसूरी में गुरुवार सुबह भट्टा गांव रोपवे पर उस समय आपात स्थिति का दृश्य तैयार किया गया, जब तकनीकी खराबी के कारण रोपवे बीच में रुक गया और उसमें सवार दो पर्यटक हवा में फंस गए। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, मसूरी पुलिस, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों पर्यटकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया गया। यह पूरी कार्रवाई प्रशासन की ओर से आयोजित मॉक ड्रिल का हिस्सा थी।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में संबंधित विभागों की तैयारी, मौके पर पहुंचने की गति, बचाव उपकरणों की उपलब्धता और आपसी समन्वय को परखना था। रोपवे जैसे पर्यटन स्थल पर तकनीकी खराबी आने की काल्पनिक स्थिति बनाकर यह देखा गया कि सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव दल किस तरह काम करते हैं और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए किस प्रकार की रणनीति अपनाई जाती है।
अभ्यास के तहत भट्टा गांव रोपवे में तकनीकी खराबी आने और दो पर्यटकों के फंसने की सूचना दी गई। इसके बाद संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने मसूरी पुलिस तथा अन्य विभागों के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। काफी मशक्कत के बाद दोनों पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास पूरा किया गया।इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों को प्राथमिक उपचार दिया और आगे के उपचार के लिए मसूरी उप जिला चिकित्सालय भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। इस दौरान बचाव कार्य के विभिन्न चरणों, विभागों के बीच तालमेल और घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी परखा गया।
नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में आपदा की सूचना मिलने से लेकर बचाव दलों के मौके पर पहुंचने तक के समय का आकलन किया गया। इसके साथ ही यह भी परखा गया कि अलग-अलग विभाग आपात स्थिति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह करते हैं। नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मसूरी में समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। इनका उद्देश्य आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को जांचना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि इस तरह के अभ्यास से संबंधित विभागों को अपनी तैयारियों की समीक्षा करने और कमियों को दूर करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि मसूरी में संचालित रोपवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर निरीक्षण और जांच की जाती है, ताकि किसी तरह की कमी सामने आने पर उसे दूर किया जा सके। मॉक ड्रिल से यह समझने में मदद मिलती है कि वास्तविक घटना के समय किस विभाग को क्या कदम उठाने हैं और किस तरह तेजी से कार्रवाई करनी है।
मसूरी में रोपवे समेत कई पर्यटन गतिविधियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। ऐसे में किसी तकनीकी खराबी या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा इंतजामों और बचाव दलों की तत्परता महत्वपूर्ण है। मॉक ड्रिल के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि किसी अप्रत्याशित घटना में पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राहत कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें।प्रशासन की ओर से आयोजित यह अभ्यास वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए किया गया था। इसमें विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी के माध्यम से बचाव प्रक्रिया, चिकित्सकीय सहायता और आपसी तालमेल का परीक्षण किया गया। इस मौके पर सुनील यादव डिप्टी कमांडेंट एनडीआरएफ, डा. जावेद चौधरी उप जिला चिकित्सालय मसूरी, राजबीर सिंह राणा एसआई एसडीआरएफ, धीरज तडियाल फायर इंचार्ज मसूरी, अभय सिंह, संजय सिंह, गणेश बहादुर, बिषन भट सहित कई लोग मौजूद थे।

