हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर मसूरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बजरंग दल द्वारा निकाली गई भव्य शोभा यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरा शहर “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों से गूंज उठा।सुबह से ही शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर और हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी आस्था प्रकट की। इसके बाद निकली शोभा यात्रा में आकर्षक झांकियां, भजन-कीर्तन और डीजे की धुनों पर झूमते श्रद्धालुओं ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। शोभा यात्रा के मार्ग पर जगह-जगह स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कचहरी परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रसाद वितरण किया गया। वहीं मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा साईं मंदिर के पास श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि हनुमान जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और जीवन में सेवा, समर्पण और अनुशासन की भावना को जागृत करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान का जीवन हमें शक्ति, निष्ठा और भक्ति का संदेश देता है। आज के दौर में जब समाज कई चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन लोगों को एकजुट करने और समाज में सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएषन के महांमत्री जगजीत कुकरेजा ने कहा कि मसूरी जैसे पर्यटन शहर में इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति से परिचित कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है, जो आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें भगवान हनुमान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, भाईचारा और सेवा की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए। इस मौके पर मनोज अग्रवाल, नागेन्द्र उनियाल, राजेष षर्मा, सचिन पवार, आषीष जोषी सहित कई लोग मौजूद थे।

