मसूरी में हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की 107वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को मालरोड स्थित गढ़वाल टेरेस के निकट उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कविवर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने अल्पायु में ही अपनी विलक्षण प्रतिभा से हिंदी और हिमवंत साहित्य को समृद्ध किया। उनके विचारों और साहित्यिक आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने बेहद कम उम्र में ही कविता लेखन शुरू कर दिया था। प्रकृति, पहाड़, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध पक्षों को उनकी कविताओं में बेहद मार्मिक ढंग से अभिव्यक्ति मिली। अल्प जीवनकाल में ही उन्होंने अपनी रचनाधर्मिता की ऐसी छाप छोड़ी, जिसने उन्हें उत्तराखंड के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी कविताएं आज भी पहाड़ की प्रकृति, संस्कृति और संवेदनाओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती हैं।
चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के अध्यक्ष शूरवीर सिंह भंडारी ने कहा कि कविवर की स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनके प्रतिमा स्थल को साहित्यिक स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष से प्रतिमा परिसर के आसपास सौंदर्यीकरण कराने तथा चंद्रकुंवर बर्त्वाल के जीवन, साहित्यिक यात्रा और प्रमुख कृतियों पर आधारित शिलापट्ट लगाने की मांग की, ताकि यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग उनके साहित्यिक योगदान से परिचित हो सकें।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि चंद्रकुंवर बर्त्वाल मसूरी और उत्तराखंड की साहित्यिक पहचान हैं। उनकी प्रतिमा स्थल के समीप जल्द ही पेयजल की व्यवस्था के लिए नल लगवाया जाएगा। इसके बाद प्रतिमा को व्यवस्थित रूप से स्थापित कर आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कविवर की जीवनी और साहित्यिक योगदान को दर्शाने वाला शिलापट्ट भी लगाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवा पीढ़ी से चंद्रकुंवर बर्त्वाल के साहित्य को पढ़ने और उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के सचिव नरेंद्र पडियार, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल, रजत अग्रवाल, गंभीर पवार, देवी गोदियाल, अनिता धनाई, जसोदा शर्मा, सुरेश गोयल, तनमीत खालसा, अमित गुप्ता, राजीव अग्रवाल सहित साहित्य प्रेमी एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।

