मसूरी में बारिश में भी नहीं थमी आस्था, भट्टा से नाग मंदिर पहुंची नाग देवता की डोली

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मसूरी। आसमान से बरसती बारिश और चारों ओर धुंध के बीच भट्टा गांव में आस्था का रंग देखने को मिला। नाग पंचमी से पहले हर वर्ष की तरह इस बार भी भट्टा गांव से भगवान नाग देवता की डोली पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ निकाली गई। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं, जबकि ढोल-दमाऊ की थाप के बीच श्रद्धालु नाग देवता के जयकारे लगाते रहे। भगवान नाग देवता की डोली भट्टा गांव से मसूरी मार्ग होते हुए कार्ट मैकेंजी मार्ग से क्यारकुली स्थित नाग देवता मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय रहा। मान्यता के अनुसार नाग देवता क्यारकुली-भट्टा क्षेत्र के रक्षक और ग्राम देवता हैं। इसी आस्था के चलते हर वर्ष नाग पंचमी से पहले डोली यात्रा निकाली जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार नाग देवता की डोली यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की पुरानी लोक परंपरा का हिस्सा है। भट्टा गांव में पूजा-अर्चना के बाद डोली को नाग मंदिर तक ले जाया जाता है। इसमें गांव के पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल होती हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच देवता के अवतरित होने की मान्यता भी इस यात्रा को खास बनाती है। आशीष रावत ने बताया कि हर वर्ष नाग पंचमी से पूर्व भगवान नाग देवता की डोली भट्टा से क्यारकुली स्थित नाग देवता मंदिर ले जाई जाती है। मंदिर में इसके बाद सप्ताहभर भागवत कथा का आयोजन होता है। इस वर्ष भी कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसका समापन 17 अगस्त को नाग पंचमी के अवसर पर होगा।
करीब 500 साल पुराना बताया जाता है मंदिर
क्यारकुली-भट्टा क्षेत्र का नाग मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। उपलब्ध स्थानीय विवरणों में मंदिर को करीब 500 वर्ष पुराना बताया गया है। इसके पीछे एक लोकमान्यता भी जुड़ी है। कहा जाता है कि पुराने समय में एक ग्रामीण की गाय रोजाना चरने के बाद लौटती थी, लेकिन उसके थनों में दूध नहीं रहता था। ग्रामीण ने जब इसकी वजह जानने की कोशिश की तो उसने गाय को एक पत्थर पर दूध चढ़ाते और वहां नाग देवता को दूध ग्रहण करते देखा। इसके बाद इस स्थान को पवित्र मानते हुए यहां मंदिर की स्थापना किए जाने की मान्यता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय के साथ यह स्थान नाग देवता की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी क्यारकुली-भट्टा और आसपास के गांवों के लोग नाग देवता को अपना रक्षक देवता मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय समाचार रिपोर्टों में भी नाग मंदिर को क्षेत्र का पौराणिक धार्मिक स्थल बताते हुए यहां दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आने और मन्नत मांगने का उल्लेख मिलता है। सुंदर सिंह कोटाल ने बताया कि नाग देवता क्षेत्र के लोगों के रक्षक देवता माने जाते हैं। हर वर्ष नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक आयोजन और मेला होता है। इसमें क्यारकुली-भट्टा के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि डोली यात्रा में ग्रामीणों की भागीदारी यह बताती है कि आधुनिक दौर में भी पहाड़ की लोक आस्था और परंपराएं जीवंत हैं। नई पीढ़ी भी इन आयोजनों से जुड़ रही है, जिससे वर्षों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा आगे बढ़ रही है।डोली यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।