govt-ads

मसूरी में एमडीडीए के नोटिस से मसूरी के पर्यटन कारोबार में हड़कंप

Blog
 Image


होमस्टे, होटल और गेस्ट हाउस संचालकों ने जताई नाराजगी, बोले- मास्टर प्लान और लैंड यूज स्पष्ट किए बिना कैसे तय होगा व्यावसायिक उपयोग

पहाडों की रानी मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मसूरी में एमडीडीए की नोटिस कार्रवाई से पर्यटन कारोबारियों में बेचौनी बढ़ गई है। होमस्टे, होटल, गेस्ट हाउस और बीएनबी संचालकों को नोटिस मिलने से नाराज लोग प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और सरकार से हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की। कारोबारियों का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करनी पड़ीं तो मसूरी के पर्यटन कारोबार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
स्थानीय निवासी सुधांशु रावत और सभासद पवन थलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आवासीय संपत्तियों में नियमों के विरुद्ध चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, उनका सवाल है कि मसूरी में मास्टर प्लान, नोटिफाइड-डीनोटिफाइड क्षेत्रों और भूमि उपयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण कारोबारियों के सामने असमंजस बना हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पृष्ठ संख्या 21 के उपखंड-2 का हवाला देते हुए कहा कि जहां मास्टर प्लान या भूमि उपयोग निर्धारित नहीं है, वहां यथास्थिति बनाए रखने से संबंधित प्रावधान पर भी विचार किया जाना चाहिए। कारोबारियों ने मांग की कि मसूरी की भौगोलिक और नियोजन संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाए।
कारोबारियों ने कहा कि सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना को प्रोत्साहित किया है। ऐसे में अब होमस्टे और अन्य पर्यटन इकाइयों को नोटिस मिलने से संचालक परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मसूरी की वास्तविक परिस्थितियों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का पक्ष प्रभावी ढंग से रखना चाहिए, ताकि नियमों के दायरे में समाधान निकाला जा सके।
सुधांशु रावत ने आरोप लगाया कि नोटिस कार्रवाई से कारोबारियों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल है, जहां पर्यटकों को ठहरने की सुविधा देने में होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और बीएनबी की अहम भूमिका है। यदि इन गतिविधियों पर व्यापक रोक लगती है तो पर्यटन उद्योग और उससे जुड़े रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
सभासद पवन थलवाल ने कहा कि मसूरी में आवासीय नक्शों पर बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और बीएनबी कारोबार से जुड़े करीब 95 प्रतिशत लोग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से अध्यादेश लाकर पुराने निर्माणों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत नियमित करने की व्यवस्था बनाने की मांग की। उनका सुझाव है कि जहां कानूनी रूप से संभव हो, वहां निर्धारित जुर्माना लेकर निर्माण को नियमित करने का विकल्प दिया जाए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अनधिकृत कमरों को नियमित करने के लिए प्रति कमरा 50 हजार रुपये शुल्क का प्रावधान होने की बात सामने आई है। उन्होंने मसूरी में भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार करने की मांग की। कारोबारियों ने बताया कि वे इस संबंध में एसडीएम मसूरी से मुलाकात कर ज्ञापन दे चुके हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार और एमडीडीए मामले का समाधान निकालने तक नोटिस कार्रवाई पर पुनर्विचार करें तथा पर्यटन कारोबारियों को राहत देने के लिए बीच का रास्ता तलाशें। कारोबारियों ने कहा कि मसूरी में वन संरक्षण कानून और भूमि उपयोग से जुड़ी पाबंदियों के बीच निर्माण तथा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नीति जरूरी है। अब सवाल यह है कि पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, पुराने निर्माणों की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच सरकार किस तरह संतुलन बनाती है। फिलहाल, नोटिस कार्रवाई ने मसूरी के पर्यटन कारोबार और स्थानीय रोजगार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।