भारतीय निशानेबाजी को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज और कोच श्रंेचंस त्ंदं का 49 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से उत्तराखंड समेत पूरे देश के खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बाद उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री पुश्कर सिंह घामी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपनी असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया। उनका निधन खेल जगत और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
उत्तराखंड की धरती से निकला विश्वस्तरीय निशानेबाज
जसपाल राणा का नाम भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। 1990 और 2000 के दशक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहराया। एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने अनेक पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार और बाद में कोचिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
खिलाड़ी ही नहीं, चौंपियन गढ़ने वाले गुरु भी थे
प्रतियोगी निशानेबाज के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ओलंपिक पदक विजेता डंदन ठींामत सहित कई युवा खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने और नई पीढ़ी तैयार करने में उनका योगदान अतुलनीय रहा है।
अचानक निधन से स्तब्ध खेल जगत
हाल ही में वे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटे थे। लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उनका उपचार चल रहा था। उनके अचानक निधन की खबर से खिलाड़ी, कोच, खेल प्रशासक और प्रशंसक स्तब्ध हैं।
प्रधानमंत्री से लेकर खिलाड़ियों तक ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , राष्ट्रपति द्वोपति मूरमूर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा सहित अनेक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय खेल जगत का प्रेरणास्रोत और समर्पित मार्गदर्शक बताया।
हमेशा याद रहेंगे जसपाल राणा
उत्तराखंड की धरती ने देश को कई महान खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन जसपाल राणा का स्थान उनमें विशेष रहेगा। उन्होंने न केवल पदक जीते, बल्कि भारत में निशानेबाजी की मजबूत नींव भी तैयार की। उनका जाना एक ऐसे युग का अंत है, जिसने भारतीय निशानेबाजी को दुनिया के शीर्ष देशों की कतार में खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धियां और उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

