सड़क चौड़ीकरण के बाद बिना ट्रीटमेंट छोड़ी गई पहाड़ी, बारिश शुरू होते ही गिरने लगे पत्थर और मलबा; स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
मसूरी में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही एक पुराना सवाल फिर सामने खड़ा हो गया है—क्या विकास कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है? शहर के स्प्रिंग रोड स्थित गुरु नानक स्कूल मार्ग पर इन दिनों यही चिंता स्थानीय लोगों को परेशान कर रही है। यहां सड़क चौड़ीकरण के लिए काटी गई पहाड़ी अब बारिश शुरू होते ही दरकने लगी है और लगातार पत्थर व मलबा सड़क पर गिर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले नगर पालिका द्वारा सड़क चौड़ीकरण का कार्य कराया गया था। सड़क तो चौड़ी हो गई, लेकिन कटे हुए पहाड़ का उचित ट्रीटमेंट नहीं किया गया। न रिटेनिंग वॉल बनाई गई, न सुरक्षा जाल लगाए गए और न ही ढलान को स्थिर करने के लिए कोई वैज्ञानिक उपाय अपनाया गया। अब हल्की बारिश में ही पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
स्कूल मार्ग पर बढ़ा खतरा
यह मार्ग गुरु नानक स्कूल सहित आसपास के आवासीय क्षेत्रों को जोड़ता है। रोजाना सैकड़ों छात्र, अभिभावक और स्थानीय लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में पहाड़ी से गिरते पत्थर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि बारिश के दौरान सड़क पर मलबा और पत्थर आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कई बार लोग बाल-बाल बचे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
मानसून से पहले ही डराने लगे हालात
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में क्षेत्रवासियों को डर है कि यदि अभी यह स्थिति है तो जुलाई-अगस्त की भारी बारिश में हालात और गंभीर हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि कटे हुए पहाड़ की ढलान कमजोर हो चुकी है और लगातार बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
विकास बनाम सुरक्षा का सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे सड़क चौड़ीकरण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास कार्यों के साथ सुरक्षा उपाय भी उतने ही जरूरी हैं। उनका सवाल है कि यदि पहाड़ काटा गया था तो उसके संरक्षण और मजबूती के लिए आवश्यक कार्य क्यों नहीं किए गए?
लोगों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासन के लिए चेतावनी
मसूरी में पिछले वर्षों में कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी दरकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्प्रिंग रोड की यह स्थिति प्रशासन के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से मांग की है कि मानसून के चरम पर पहुंचने से पहले पहाड़ी का वैज्ञानिक निरीक्षण कर सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्प्रिंग रोड पर गिरते पत्थर और मलबा किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। फिलहाल हर बारिश के साथ लोगों की निगाहें सड़क पर कम और ऊपर दरकती पहाड़ी पर ज्यादा टिकी हुई हैं।

