बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली संभावित आपदाओं से निपटने के लिए मसूरी प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने बुधवार को एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की। मसूरी-एलकेडी (एलबीएस/एलकेडी) रोड पर हुए इस अभ्यास में ऐसा दृश्य तैयार किया गया, मानो भारी बारिश के चलते पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा हो। इस काल्पनिक आपदा में एक मिनी बस और एक कार मलबे की चपेट में आ गई। पूरे अभियान का नेतृत्व एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने किया।
मॉक ड्रिल के तहत दर्शाया गया कि पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने से 20 यात्रियों से भरी एक मिनी बस सड़क पर फंस गई, जबकि एक कार गहरी खाई में जा गिरी। कार में चार लोग सवार थे, जिनमें से दो की मौके पर मौत और दो गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति बनाई गई।
घटना की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया। महज 15 मिनट के भीतर मसूरी पुलिस, फायर सर्विस, 108 एंबुलेंस, उप जिला चिकित्सालय, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग सहित अन्य विभागों की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं।
सबसे पहले मौके पर पहुंची मसूरी पुलिस और फायर सर्विस ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। फायर सर्विस के जवान वन विभाग के सहयोग से रस्सियों के सहारे गहरी खाई में उतरे और कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल दोनों लोगों को स्ट्रेचर के माध्यम से ऊपर लाकर 108 एंबुलेंस और उप जिला चिकित्सालय की एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क पर फैले मलबे को हटाकर यातायात बहाल करने का कार्य शुरू किया। लगातार हो रही बारिश के बीच करीब तीन घंटे तक चले इस अभियान में सभी विभागों के बीच समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और संसाधनों के उपयोग का परीक्षण किया गया।
एसडीएम राहुल आनंद ने बताया कि बरसात के मौसम में भूस्खलन, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर इस प्रकार की मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं, ताकि किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सूचना मिलने के 15 मिनट के भीतर सभी प्रमुख विभाग घटनास्थल पर पहुंच गए। मसूरी पुलिस और फायर सर्विस ने सबसे पहले पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया, जिसके बाद अन्य विभाग भी तेजी से मौके पर पहुंचे। यह दर्शाता है कि सभी विभाग आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
एसडीएम ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से भी अपील की कि बारिश के दौरान किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें। उन्होंने कहा कि समय पर मिली सूचना कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
यह मॉक ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि पहाड़ों में हर मानसून नई चुनौतियां लेकर आता है और उनसे निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, फायर सर्विस और अन्य विभागों का बेहतर तालमेल ही सबसे बड़ा हथियार है। मसूरी में आयोजित इस अभ्यास ने साबित किया कि यदि सभी एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें तो बड़ी से बड़ी आपदा का प्रभाव भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस मौके पर नायब तहसीलदार उपेन्द्र सिंह राणा, कोतवाल देवेन्द्र चौहान, एसएसआई सतेन्द्र भाटी, फायर सर्विस इंचार्ज धीरज तडियाल, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी शिवराज लोधियाल, जेई एमडीडीए अनुराग नौटियाल, ईओ रजनीश डोबरियाल, कृष्ण कांत सहायक अभियंता गढ़वाल जल संस्थान, पंकज थपलियाल एसडीओ यूपीसीएल सहित कई लोग मौजूद थे।

