मसूरी स्थित सीजेएम हैम्पटन कोर्ट स्कूल का वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह इस बार केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह शांति, संस्कृति और आधुनिक जीवन के संतुलन पर एक गहरा सामाजिक संदेश बनकर उभरा। पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रहा “शांति और संस्कृति”, जिसे विद्यार्थियों ने अपने प्रदर्शन, विचार और रचनात्मकता के माध्यम से जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, विद्यालय के ही पूर्व छात्र और वर्तमान में कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद प्रार्थना और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण बना दिया। सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति रही कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों का ‘माइम एक्ट’, जिसमें बिना शब्दों के युद्ध की भयावहता और उसकी कीमत को दिखाया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शांति केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि मानवता की आवश्यकता है। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ विद्यार्थियों तक ने नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की समृद्ध झलक पेश की, जिसने सभागार को रंग और ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर एलकेजी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही, खेल, कला और अन्य गतिविधियों में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले विद्यार्थियों को भी मंच पर सराहा गया। यह सम्मान न केवल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला रहा, बल्कि अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा भी बना। मुख्य अतिथि दीपक रावत ने शिक्षा के व्यापक अर्थ को रेखांकित करते हुए कहा कि “सच्ची शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमें एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाती है।” उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग की चुनौतियों पर भी बात की और विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने खास तौर पर यह संदेश दिया कि बच्चे समय निकालकर प्रकृति के बीच पैदल चलें और वास्तविक दुनिया से जुड़ाव बनाए रखें। कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या सिस्टर आइवी, सुपीरियर सिस्टर अनीता मैथ्यू, समन्वयक रेखा सिंह और नंदिनी सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि, पूर्व छात्र और अभिभावक उपस्थित रहे।

