मसूरी। नगर पालिका परिषद मसूरी के पूर्व बोर्ड में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच एक बार फिर शुरू होने से पालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पूर्व पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता के कार्यकाल में पालिका संपत्तियों को लंबी अवधि के लिए लीज पर दिए जाने सहित अन्य वित्तीय मामलों को लेकर शासन स्तर पर जांच आगे बढ़ाई गई है। नगर विकास विभाग की टीम ने पालिका पहुंचकर पुराने वित्तीय दस्तावेज और संबंधित फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं। शहरी विकास विभाग की वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी परवीन कौर के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पूर्व में हुई जांच की रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया। टीम उन बिंदुओं की भी पड़ताल कर रही है, जो पिछली जांच के दौरान छूट गए थे। शासन ने जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए टीम को 15 दिन का समय दिया है। वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी परवीन कौर ने बताया कि पूर्व में हुई जांच में वह शामिल नहीं थीं और उस जांच समिति के कई सदस्य अब अन्य विभागों में स्थानांतरित हो चुके हैं। पिछली रिपोर्ट में कुछ बिंदुओं की जांच शेष रह गई थी। शासन के निर्देश पर उन्हीं बिंदुओं को दोबारा जांच के दायरे में लिया गया है। टीम यह भी देख रही है कि संबंधित मामलों में कितनी वित्तीय अनियमितता हुई और किन दस्तावेजों को पूर्व में फाइलों में शामिल नहीं किया गया था।
लंबी अवधि की लीज पर सबसे ज्यादा नजर
जांच में पालिका की संपत्तियों को लंबी अवधि के लिए लीज पर दिए जाने का मामला प्रमुखता से शामिल है। टीम संबंधित लीज, स्वीकृति, भुगतान और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही शासन की ओर से पूर्व में मांगी गई सूचनाओं का भी बिंदुवार परीक्षण किया जा रहा है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि पूर्व में पालिका की संपत्तियां लंबी अवधि के लिए लीज पर दी गई थीं, जिनकी शासन स्तर पर जांच हो चुकी है। शासन की ओर से कुछ तकनीकी बिंदुओं पर अतिरिक्त सूचना मांगी गई है। फाइलों की संख्या और उनका आकार अधिक होने के कारण शहरी विकास विभाग की टीम पालिका कार्यालय पहुंचकर स्वयं दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है। पालिका की ओर से जांच टीम को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व की जांच रिपोर्ट भी पालिका में उपलब्ध है और उसी के आधार पर जिन बिंदुओं पर जानकारी अधूरी रह गई थी, उनकी सूचना अब शासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
पूर्व पालिका बोर्ड के कार्यकाल से जुड़े वित्तीय मामलों की दोबारा जांच शुरू होने से पालिका में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच टीम को दस्तावेजों की पड़ताल में क्या तथ्य सामने आते हैं और शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर क्या निष्कर्ष निकलते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूर्व में सामने आए मामलों में वास्तव में कितनी वित्तीय अनियमितता हुई थी और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हो।

