पद्मश्री जागर सम्राट की प्रस्तुति में दिखा लोक आस्था का अद्भुत रंग, जागरों की गूंज के बीच देव डोलियों के नृत्य ने बांधा समां
12 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित मसूरी शरदोत्सव-2026 का समापन पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण की यादगार जागर नाइट के साथ हुआ। शनिवार देर रात टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रीतम भरतवाण के जागरों और पारंपरिक लोकगीतों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। ढोल की थाप पर गूंजते जागरों के बीच दर्शक झूमते नजर आए, वहीं पारंपरिक देव डोलियों के नृत्य ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। जागर गायन के दौरान देवताओं के आह्वान से जुड़ी लोक परंपरा का दृश्य देखने को मिला और माहौल भक्तिमय हो गया। लोक संगीत, परंपरा और आस्था के इस संगम के साथ पांच दिवसीय शरदोत्सव को विदाई दी गई।
समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला भी मौजूद रहे। नगर पालिका प्रशासन की ओर से आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने शरदोत्सव के सफल आयोजन के लिए पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, उनकी टीम और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।
जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने अपनी प्रस्तुति में उत्तराखंड की पारंपरिक जागर गायन शैली और लोकगीतों के जरिए पहाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। ढोल की थाप और जागरों की गूंज के बीच दर्शक देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की लय पर देव डोलियों के नृत्य ने उपस्थित लोगों को लोक आस्था की परंपराओं से रूबरू कराया। जागर उत्तराखंड की ऐसी पारंपरिक लोक विधा है, जिसमें लोक देवताओं का आह्वान और धार्मिक मान्यताएं महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। प्रीतम भरतवाण की प्रस्तुति ने इस परंपरा को मंच पर साकार किया। शरदोत्सव की अंतिम रात में दर्शकों की भागीदारी और कलाकार के प्रति उत्साह ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
पत्रकारों से बातचीत में प्रीतम भरतवाण ने कहा कि मसूरी से उनका गहरा जुड़ाव है। शरदोत्सव ने उन्हें शुरुआती दौर में मंच प्रदान किया था और आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें मसूरी और यहां के लोगों का विशेष योगदान है। उन्होंने कहा कि अपने लोगों के बीच और अपने ही शहर में प्रस्तुति देना किसी भी कलाकार के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव होता है।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हिमालयी संस्कृति को देश और विदेश के युवाओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। वह युवाओं को पारंपरिक संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। कई छात्र-छात्राएं ढोल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों को सीख रहे हैं और लोक परंपराओं में रुचि लेकर आगे आ रहे हैं। यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए सकारात्मक संकेत है। प्रीतम भरतवाण ने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना युवा पीढ़ी की पहचान है। उन्होंने श्कल्चर फॉर ह्यूमैनिटीश् के तहत किए जा रहे कार्यों का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मसूरी केवल उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अतिथि सत्कार की पहचान भी है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर और लोक संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती है। शरदोत्सव जैसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलती है। गणेश जोशी ने कहा कि मसूरी को स्वच्छ, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने के साथ उसकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने शरदोत्सव के सफल आयोजन के लिए नगर पालिका प्रशासन और आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई दी।
पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कहा कि मसूरी में शरदोत्सव की परंपरा लंबे समय से चली आ रही थी, लेकिन पिछले 12 वर्षों से इसका आयोजन नहीं हो पाया था। नगर पालिका की ओर से इस सांस्कृतिक आयोजन को दोबारा शुरू करना सराहनीय कदम है। इस बार उत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ प्रदेश की लोक संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सभ्यता को समझने तथा उससे जुड़ने का अवसर मिलता है। लोक परंपराओं का संरक्षण सामूहिक प्रयासों से ही संभव है और शरदोत्सव जैसे मंच इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने शरदोत्सव के सफल समापन पर मसूरी की जनता, कलाकारों, सहयोगियों, अधिकारियों और पालिका की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से शरदोत्सव को दोबारा शुरू किया गया था, वह पूरा होता दिखाई दे रहा है। उत्सव के माध्यम से युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ स्थानीय और प्रदेश के कलाकारों को मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को साथ लेकर मसूरी की संस्कृति और सभ्यता का संरक्षण करना उनकी प्राथमिकता है। इस बार लोगों की भागीदारी और कलाकारों के उत्साह ने आयोजन को खास बनाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, ताकि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिले।
शरदोत्सव के समापन अवसर पर नगर पालिका प्रशासन ने आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों और कलाकारों को सम्मानित किया। पांच दिवसीय उत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की परंपराओं को मंच मिला। अंतिम शाम प्रीतम भरतवाण की जागर नाइट ने लोक आस्था और पारंपरिक संगीत के साथ उत्सव को यादगार विदाई दी।शरदोत्सव-2026 का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए उसे मंच देना और नई पीढ़ी को उससे जोड़ना जरूरी है। प्रीतम भरतवाण की जागर नाइट ने मसूरी में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों के लगाव को एक बार फिर सामने रखा।

