मसूरी की सौ साल पुरानी लाइब्रेरी बनी प्रेरणा का मंच, बोले पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी यहीं बैठकर पढ़ाई की, उसी ने जीवन की दिशा बदली

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मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी केवल पर्यटन की नगरी नहीं, बल्कि ज्ञान, साहित्य और बौद्धिक परंपरा की भी पहचान है। इसका सजीव उदाहरण शनिवार को तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी में देखने को मिला, जहां मसूरी हेरिटेज सेंटर की 89वीं लंढौर लेक्चर सीरीज में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनिल रतूड़ी की दो चर्चित पुस्तकों भंवररू एक प्रेम कहानी और खाकी में स्थित प्रज्ञा पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में पुस्तकों की समीक्षा के साथ पढ़ने की संस्कृति, सुशासन, संविधान और जनसेवा पर भी गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम की सबसे भावुक घड़ी तब आई, जब पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी से अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि 1960 और 70 के दशक में छात्र जीवन के दौरान शायद ही कोई शाम ऐसी होती थी, जब वह इस लाइब्रेरी में पढ़ने नहीं आते थे। उन्होंने कहा कि इसी पुस्तकालय ने उनके व्यक्तित्व और सोच को आकार दिया और आज वर्षों बाद उसी मंच पर अपनी पुस्तकों पर चर्चा होना उनके लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि उनका उपन्यास भंवर एक प्रेम कहानी एक आईएएस अधिकारी के लगभग 30 वर्षों के कार्यकाल और उसके जीवन मूल्यों पर आधारित काल्पनिक रचना है, जबकि श्खाकी में स्थित प्रज्ञाश् उनके पुलिस सेवा के दौरान के वास्तविक अनुभवों, चुनौतियों और संस्मरणों का संग्रह है। उन्होंने बताया कि दोनों पुस्तकों को पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है और इनके तीन-तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। युवा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को संदेश देते हुए अनिल रतूड़ी ने कहा कि हर अधिकारी भारतीय संविधान की शपथ लेकर सेवा में आता है, इसलिए उसे संविधान और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन ईमानदारी, संवेदनशीलता और जनसेवा का भाव ही एक अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान बनता है। कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने दोनों पुस्तकों की सराहना करते हुए कहा कि एक पुस्तक प्रशासनिक मूल्यों की कहानी है तो दूसरी पुलिस सेवा के अनुभवों की सजीव प्रस्तुति। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वही अधिकारी सफल होता है, जो जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझता और समाधान करता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव से अधिक महत्वपूर्ण पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यशैली है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) को लोकतंत्र का मजबूत माध्यम बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनाने की सलाह दी। मसूरी हेरिटेज सेंटर की अध्यक्ष सुरभि अग्रवाल ने कहा कि लंढौर लेक्चर सीरीज के 14 वर्षों का उद्देश्य केवल व्याख्यान आयोजित करना नहीं, बल्कि मसूरी की बौद्धिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी एक सदी से अधिक समय से ज्ञान का केंद्र रही है, लेकिन आज बच्चों का पुस्तकालयों से जुड़ाव कम हुआ है। इसलिए ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और बच्चों को पुस्तक संस्कृति, लेखन और अध्ययन की ओर प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी केवल पर्यटन और ट्रैफिक जाम का शहर नहीं, बल्कि साहित्यकारों, शिक्षाविदों और प्रतिभाशाली युवाओं की भी नगरी है। शहर में अपार प्रतिभाएं हैं, जिन्हें मंच देने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से लंढौर लेक्चर सीरीज लगातार देश के प्रतिष्ठित लेखकों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों को मसूरी से जोड़ रही है। कार्यक्रम के अंत में अनिल रतूड़ी ने अपनी दोनों पुस्तकों की प्रतियां तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी को भेंट कीं, ताकि शहर के पाठक और युवा इन पुस्तकों का अध्ययन कर सकें। इस अवसर पर प्रो. किरण सूद, बीना गुनसोला, नीता रावत, संगीता लेखवार, शूरवीर भंडारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।