धरने की चेतावनी, मीडिया का दबाव और फिर दर्ज हुई एफआईआर,हत्या का मुकदमा दर्ज, मसूरी होमस्टे मौत मामले में पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

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मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी के एक होमस्टे में गुरुग्राम की सॉफ्टवेयर इंजीनियर राधा गायत्री की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल एक मौत की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली, जांच की गति और परिजनों के आरोपों को लेकर भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। मृतका के परिजनों का आरोप है कि कई दिनों तक न्याय की गुहार लगाने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई और आखिरकार धरने की चेतावनी तथा मीडिया में मामला लगातार उठने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया।

शनिवार को मसूरी कोतवाली पहुंचे मृतका के पिता पारुपुडी सुधाकर ने पुलिस को तहरीर देते हुए अपनी बेटी की मौत को हत्या बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी किसी भी प्रकार का नशा नहीं करती थी, जबकि घटना के बाद उसे शराब पीने वाली बताकर उसकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। परिजनों ने कहा कि शादी के कुछ समय बाद से ही दामाद और बेटी के बीच विवाद की जानकारी उन्हें मिलती रही थी। परिवार ने कई बार समझौते और बातचीत के जरिए रिश्ते को संभालने की कोशिश भी की थी। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को योजनाबद्ध तरीके से मसूरी लाया गया और उसके साथ कोई साजिश हुई हो सकती है। उन्होंने पुलिस को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे कोतवाली परिसर के बाहर धरने पर बैठेंगे और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

घटना 15 जून की है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी मामला केवल जांच तक सीमित रहा। इस दौरान परिजन लगातार सवाल उठाते रहे कि जब मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है तो हत्या की आशंका के आधार पर मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है। मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया और परिजनों ने खुलकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू किए, तब पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर के आधार पर हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया।

स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि परिजन लगातार दबाव नहीं बनाते और मीडिया इस मामले को प्रमुखता से नहीं उठाता तो क्या पुलिस हत्या का मुकदमा दर्ज करती? लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सुरक्षित रखा गया था, फॉरेंसिक जांच जारी थी और परिजन शुरू से संदेह जता रहे थे, तो उनकी शिकायत को तत्काल गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि शुरुआत से ही मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही थी और सभी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे थे।

मसूरी पुलिस ने मृतका के पति के खिलाफ धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। विसरा रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आम नागरिक की शिकायत को गंभीरता से लेने के लिए उसे आंदोलन की चेतावनी देनी पड़ेगी और मीडिया का सहारा लेना पड़ेगा? फिलहाल इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा, लेकिन इतना तय है कि राधा गायत्री मौत मामला अब पुलिस की कार्यशैली पर भी कई सवाल छोड़ गया है।